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Digital Arrest: सीकर में डिजिटल अरेस्ट का जाल, रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 55 लाख की धोखाधड़ी; जानें

Sun, 05 Jul 2026 06:02 PM IST
सीकर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर

सार

सीकर में साइबर ठगों ने पुलिस, ईडी और सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। जांच और जमानत के नाम पर 55 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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साइबर अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीकर जिले में साइबर अपराधियों ने एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर झांसे में लेकर 55 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी, ईडी अधिकारी और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पेश कर पीड़ित को इतना भयभीत किया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दी। मामले की शिकायत के बाद साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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जानकारी के अनुसार, 65 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी महावीर प्रसाद शर्मा को 1 जुलाई को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से संचालित एक मोबाइल नंबर से आपत्तिजनक संदेश भेजे गए हैं। साथ ही दावा किया गया कि इस मामले में दिल्ली के दरियागंज थाने में उनके खिलाफ 24 मुकदमे दर्ज हैं और उन्हें पूछताछ के लिए दिल्ली आना होगा।

इसके बाद ठगों ने पीड़ित को वीडियो कॉल पर जोड़कर कथित पुलिस थाना, जांच अधिकारी और अदालत जैसी फर्जी व्यवस्था दिखाई। वीडियो कॉल के दौरान अलग-अलग लोग पुलिस अधिकारी, ईडी अधिकारी और न्यायिक अधिकारी बनकर सामने आए। उन्होंने पीड़ित को बताया कि उनके बैंक खाते संदिग्ध लेन-देन से जुड़े हैं और करोड़ों रुपये की अवैध राशि का संबंध उनके खातों से है।
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साइबर अपराधियों ने गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त करने और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित पर लगातार मानसिक दबाव बनाया। साथ ही उन्हें किसी से भी संपर्क नहीं करने और पूरे मामले को गोपनीय रखने के निर्देश दिए। डर के माहौल में पीड़ित से कई बार बैंकिंग लेन-देन कराए गए।

ठगों ने कथित जांच और जमानत प्रक्रिया के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 55 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। लेकिन जब न तो पैसे लौटे और न ही आरोपियों से संपर्क हो सका, तब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।
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पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी से घबराएं नहीं। पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।
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