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Khatushyam Fair: खाटूश्याम बाबा को पहनाया हीरे का मुकुट, लक्खी मेले में बढ़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़

Tue, 04 Mar 2025 03:31 PM IST
सीकर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर

सार

खाटू श्यामजी में चल रहे लक्खी मेले के पांचवें दिन बाबा श्याम का विशेष शृंगार किया गया। बाबा को विदेश से लाए गए सुगंधित फूलों से सजाया गया और रत्न-जड़ित सोने का मुकुट पहनाया गया। मेले का मुख्य आयोजन 11 मार्च को एकादशी के दिन होगा, जब बाबा श्याम की नगर परिक्रमा निकाली जाएगी। 8 मार्च से भक्तों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। 
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बाबा खाटूश्याम का भव्य शृंगार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध बाबा खाटूश्यामजी के फाल्गुन लक्खी मेले का आज पांचवां दिन है। आज सुबह से बाबा श्याम के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। बाबा के दर्शन के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा, यूपी, बिहार सहित देश-विदेश से श्रद्धालु आ रहे हैं। 

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आपको बता दें कि यहां की गई व्यवस्थाओं के चलते भक्त आसानी से कुछ देर में ही बाबा श्याम के दर्शन कर रहे हैं। श्री श्याम मंदिर कमेटी द्वारा भक्तों के स्वागत के लिए मंदिर परिसर क्षेत्र में गुलाब जल और सुगंधित इत्र जल का छिड़काव किया जा रहा है।

हीरे और रत्न जड़ित सोने का मुकुट पहनाया गया
आज बहुत मनमोहक तरीके से बाबा श्याम का शृंगार किया गया है। बाबा को विदेशों से लाए गए गुलाबी, हरे और लाल रंग के सुगंधित फूलों से सजाया गया है। इसके अलावा रत्नजड़ित सोने का मुकुट पहनाया गया है, जिसके बीचोंबीच मोरपंख डिजाइन का हीरा लगा हुआ है। वहीं आज बाबा को नीलम लगे सोने का हार भी पहनाया गया है। इसके अलावा बाबा श्याम के गर्भ गृह को भी गुलाबी थीम पर सजाया गया है।
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8 मार्च से बढ़ेगी भीड़
बाबा श्याम का फाल्गुन लक्खी मेले का मुख्य आयोजन एकादशी को होगा। इस दिन बाबा श्याम को नगर भ्रमण कराया जाता है। इससे पहले 8 मार्च से भक्तों की संख्या बढ़ने का अनुमान है और लगातार 11 मार्च तक मंदिर में भीड़ रहेगी। ऐसे में अगर भक्तों की संख्या बढ़ती है तो चारण मैदान और लखदातार ग्राउंड से होकर भक्त खाटूश्यामजी मंदिर में पहुंचेंगे। इसमें भक्तों को आठ किलोमीटर चलना पड़ेगा।

कौन हैं बाबा श्याम
हारे के सहारे बाबा श्याम को भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। महाभारत युद्ध के दौरान भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों की तरफ से युद्ध में शामिल होने जा रहे थे। बर्बरीक के पास तीन ऐसी तीर थे, जो पूरे युद्ध को पलट सकते थे। इसी को लेकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप में आए और उनसे शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने भी बिना संकोच किया भगवान कृष्ण को अपना शीश दान में दे दिया तब भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर बर्बरीक को कहा कि बर्बरीक तुम कलयुग में श्याम के नाम से पूजे जाओगे, तुम्हें लोग मेरे नाम से पुकारेंगे और तुम हारे हुए भक्तों का सहारा बनोगे।

 

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