रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक और खुशखबरी सामने आई है। रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन आरबीटी-124 रिद्धि नाल घाटी वन क्षेत्र में अपने नन्हे शावक के साथ नजर आई है। वन विभाग की नियमित गश्त और मॉनिटरिंग के दौरान बाघिन और शावक की मौजूदगी दर्ज की गई।
वन विभाग के अनुसार शावक की उम्र करीब दो से तीन माह आंकी जा रही है। बाघिन रिद्धि के साथ शावक के दिखाई देने के बाद विभाग ने उनकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है, ताकि दोनों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
और भी शावक होने की संभावना
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि फिलहाल बाघिन के साथ एक ही शावक दिखाई दिया है। हालांकि संभावना है कि उसने एक से अधिक शावकों को जन्म दिया हो। उन्होंने कहा कि जब तक अन्य शावक नजर नहीं आते, तब तक उनकी वास्तविक संख्या के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
ये भी पढ़ें: Rajasthan: 'महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर', मुख्यमंत्री भजनलाल बोले- मोदी सरकार ने बदली गांवों की तस्वीर
संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम
डीएफओ ने बताया कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, प्रभावी गश्त, वन्यजीव सुरक्षा उपायों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से बाघों की प्रजनन सफलता लगातार बनी हुई है। बाघिन के साथ शावक का दिखाई देना इन प्रयासों की सफलता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बढ़ रही है बाघों की संख्या
रणथंभौर को देश में बाघों की 'नर्सरी' के रूप में भी जाना जाता है। यहां बढ़ती बाघों की संख्या न केवल वन विभाग बल्कि वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी उत्साहजनक है। रणथंभौर के बाघों ने प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व में भी बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वन विभाग के अनुसार वर्तमान में रणथंभौर टाइगर रिजर्व में कुल 77 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं। इनमें 23 बाघिन, 25 बाघ और 29 शावक शामिल हैं। वन विभाग ने नाल घाटी क्षेत्र में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं। बाघिन और शावक को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।