रणथम्भौर के अनसुने प्रहरी: बारिश, जंगल और बाघों के बीच 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात वनकर्मी
जब अधिकांश लोग मानसून की बारिश का आनंद लेते हैं, तब रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के वनकर्मी उसी बारिश में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे होते हैं। घने जंगल, फिसलन भरे रास्ते, उफनते नाले और लगातार वर्षा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच रणथम्भौर की दूरस्थ वन चौकियों पर तैनात वन रक्षक, वनपाल और अन्य फील्ड स्टाफ दिन-रात मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं।
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि टाइगर रिजर्व की कई वन चौकियां ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तक पहुंचना भी बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद वनकर्मी 24 घंटे निगरानी रखते हुए बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वायरलेस संचार प्रणाली, नियमित वाहन एवं पैदल गश्त तथा आधुनिक निगरानी व्यवस्था के जरिए प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है।
डीएफओ ने बताया कि मानसून के दौरान जंगल में प्राकृतिक जल स्रोत सक्रिय हो जाते हैं, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों में भी बदलाव आता है। ऐसे समय में फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। वनकर्मी न केवल बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा तथा मार्गदर्शन का दायित्व भी निभाते हैं।
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बारिश के दौरान विशेष रेन गियर, वायरलेस सेट और आवश्यक उपकरणों से लैस वनकर्मी दिन-रात गश्त कर रहे हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रशासन का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल आधुनिक तकनीक के भरोसे संभव नहीं है। इसके पीछे वनकर्मियों की निष्ठा, साहस और निरंतर समर्पण सबसे बड़ी ताकत है। सीमित संसाधनों के बावजूद दूरस्थ वन चौकियों पर कार्यरत ये कर्मचारी वास्तव में रणथम्भौर के "अनसुने प्रहरी" हैं, जिनके अथक प्रयासों से देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है।