राजस्थान में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास आबादी वाले क्षेत्रों में तेंदुए की बढ़ती आवाजाही और इंसानों पर हमलों को रोकने के लिए वन विभाग ने केरल मॉडल की तर्ज पर हाईटेक सेंसर और साइलेंट डिवाइस लगाने की तैयारी शुरू की है। राज्य में पहली बार अपनाई जा रही इस तकनीक के तहत जंगल से निकलकर बस्तियों की ओर आने वाले वन्यजीवों की परछाई और गतिविधियों को सेंसर पकड़ लेंगे। जानवर के पास पहुंचते ही तेज अलार्म बज उठेगा, जिससे सैकड़ों मीटर दूर तक अलर्ट पहुंच जाएगा। इससे ग्रामीणों को सुरक्षित होने का अवसर मिलेगा और शोर सुनकर तेंदुआ भी वापस जंगल की तरफ भाग जाएगा।
इन संवेदनशील इलाकों में लगेंगे उपकरण
वन विभाग ने तेंदुए की अत्यधिक आवाजाही वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर प्राथमिकता पर रखा है। योजना के तहत सवाई माधोपुर के पुराने शहर के नजदीकी इलाकों सहित फलोदी रेंज के दूमोंदा, हिंदवाड़ और टोडरा गांव को शामिल किया गया है। इसके अलावा जंगल से आबादी की ओर आने वाली मुख्य पगडंडियों और कच्चे रास्तों पर भी ये उपकरण लगाए जाएंगे। विभाग का प्रयास है कि जानवरों के बस्तियों में दाखिल होने से पूर्व ही चेतावनी तंत्र सक्रिय हो जाए।
तीन साल के बच्चे पर हुआ था हमला
रणथंभौर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाल ही में एक दर्दनाक हादसा सामने आया था, जहां जंगल से निकला तेंदुआ घर की दहलीज से तीन साल के मासूम बच्चे को परिजनों के सामने ही उठाकर ले गया। बच्चे के माता-पिता ने करीब 100 मीटर तक तेंदुए का पीछा भी किया, लेकिन वह नजरों से ओझल हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने खून के धब्बों और पगमार्क का पीछा करते हुए पहाड़ी पर जाकर देखा तो तेंदुआ मासूम के शव के पास बैठा था। इस घटना से क्षेत्र में दहशत फैल गई थी, जिसके बाद सुरक्षा इंतजाम कड़े किए जा रहे हैं।