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Sardarshahar Bypoll: RLP ने मुकाबले को बनाया त्रिकोणीय, क्या सिम्पैथी को टक्कर दे सकेगा जाट वोटर्स का गणित?

सार

सरदारशहर सीट कांग्रेस नेता पंडित भंवरलाल शर्मा के निधन से खाली हुई है। लोगों की सहानुभूति को देखते हुए कांग्रेस ने उनके बेटे अनिल शर्मा को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने अशोक कुमार पिंचा को चुनाव मैदान में उतारा है। पिंचा ने 2008 के चुनाव में शर्मा को भारी मतों से हराया था।
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लालचंद मूंड, अनिल शर्मा और अशोक कुमार पिंचा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। कांग्रेस ने स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को टिकट दे दिया है। वहीं, भाजपा ने अशोक कुमार पिंचा को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया है। टक्कर इन दोनों नेताओं के बीच ही मानी जा रही है, लेकिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने इस उपचुनाव को त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है।

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दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी अनिल शर्मा ब्राह्मण समाज से हैं। भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार पिंचा जैन समाज से हैं और आरएलपी ने जाट समुदाय के  लालचंद मूंड को उपचुनाव के मैदान में उतारा है। सरदारशहर विधानसभा सीट पर जाट वोटकर की संख्या 65000 और ब्राह्मण मतदाता 45000 हैं। वहीं, जैनों की संख्या महज चार हजार है, इसके बाद भी पिंचा 2008 में एक बार भाजपा से विधायक बन चुके हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सीट पर जातीय समीकरण से ज्यादा स्थानीय रणनीति काम करती है।

कांग्रेस ने सिम्पैथी और RLP ने जाट कार्ड खेला, भाजपा का पूर्व विधायक पर भरोसा 
  • सरदारशहर सीट कांग्रेस नेता पंडित भंवरलाल शर्मा के निधन से खाली हुई है। शर्मा छह बार विधायक रह चुके हैं। 9 अक्टूबर को उनका निधन हो गया था। लोगों की सहानुभूति को देखते हुए कांग्रेस ने शर्मा के बेटे अनिल शर्मा को टिकट दिया है। वे राजस्थान आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन हैं और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला हुआ है।
  • भाजपा ने अशोक कुमार पिंचा को चुनाव मैदान में उतारा है। पिंचा ने 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता पंडित भंवरलाल शर्मा को भारी मतों से हराया था। उस दौरान उन्हें 73902 वोट मिले थे, ये जीत भाजपा के लिए बड़ी मानी जा रही थी। क्योंकि 1993 के बाद से इस सीट पर लगातार कांग्रेस का प्रत्याशी ही जीत रहा था। ऐसे में जाट समाज से कई दावेदार होने के बाद भी भाजपा ने पूर्व विधायक अशोक कुमार पिंचा पर ही भरोसा जताया।
  • सरदारशहर सीट पर जाट समाज का दबदबा होने के बाद भी भाजपा और कांग्रेस ने इस समुदाय के किसी दावेदार को चुनाव मैदान में नहीं उतारा। इससे समाज के लोगों में नाराजगी बताई जा रही थी। इसी नाराजगी को भुनाने के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी ने  लालचंद मूंड को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में अब यह देखना बड़ा ही रोचक होगा कि मूंड सिर्फ वोट कटवा उम्मीदवार बनकर रह जाएंगे या फिर वे कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होंगे। 
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बसपा की टिकट पर चुनाव हार चुके हैं मूंड  
आरएलपी प्रत्याशी लालचंद मूंड दूध उत्पादक संघ के अध्यक्ष हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में माना जा रहा है कि आरएलपी अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने उन्हें इसलिए इसलिए भी मैदान में उतारा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के वोटर उनके पाले में आ जाएं। अगर, जाट कार्ड भी कामयाब हुआ तो मूंड भाजपा-कांग्रेस को अच्छी टक्कर दे सकते हैं। बात दें कि मूंड इससे पहले 2008 में बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें कारारी हार का सामना करना पड़ा था। मूंड को सिर्फ 8084 वोट ही मिले थे।  

चुनावी मैदान में 12 उम्मीदवार
सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव के लिए 12 प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस, भाजपा और आरएलपी के प्रत्याशी के अलावा सीपीआई (एम) से सांवरमल मेघवाल, इंडियन पीपुल्स ग्रीन पार्टी से परमाराम नायक ने नामांकन किया है। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उमेश साहू, राजेंद्र भांबू, प्रेम सिंह, सुभाष चंद्र, सांवरमल प्रजापत, विजयपाल श्योराण, सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित ने पर्चा फाइल किया है। 
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