प्रदेश सरकार जहां सरकारी भवनों और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्यों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं सलूंबर जिले की सराड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत निम्बोदा में चल रहे शौचालय निर्माण कार्य ने इन दावों की पोल खोल दी है। महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल, निम्बोदा में बन रहे शौचालय को लेकर अब खुद विद्यालय प्रशासन ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रिंसिपल ने एसडीएम और बीडीओ को लिखा पत्र
विद्यालय के प्रिंसिपल ने संबंधित उपखंड अधिकारी यानी एसडीएम और विकास अधिकारी यानी बीडीओ को पत्र लिखकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। प्रिंसिपल ने अपने पत्र में साफ तौर पर कहा है कि विद्यालय परिसर में हाल ही में शुरू हुआ शौचालय निर्माण बेहद घटिया और निम्न स्तर की सामग्री से किया जा रहा है। उन्होंने भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका भी जताई है।
आरसीसी छत में भारी अनियमितताओं का आरोप
पत्र के मुताबिक शौचालय की छत पर किए गए आरसीसी कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। आरोप है कि छत पर पानी डालते ही पानी सीधे नीचे तक रिसने लगा, जिससे निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा दीवारों की चुनाई में भी लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। निर्माणाधीन शौचालय के टैंक को लेकर भी शिकायत की गई है कि केवल डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया गया, जो तकनीकी मानकों के विपरीत बताया जा रहा है।
तस्वीरों में भी दिख रही निर्माण की खराब गुणवत्ता
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल की तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रहा है कि आरसीसी भराई के दौरान मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। निर्माण पूरा होने से पहले ही छत की परतें खुलने लगी हैं, जिससे पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता संदेह के घेरे में आ गई है।
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ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी
घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर यदि इस तरह के घटिया निर्माण कार्य होंगे तो बच्चों की सुरक्षा पर सीधा खतरा मंडरा सकता है।
जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्य के दौरान जिम्मेदार अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी निगरानी क्यों नहीं कर पाए। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही गुणवत्ता की जांच कर ली जाती तो मामला यहां तक नहीं पहुंचता।
सरकार शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर होने के कारण भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
जांच और कार्रवाई पर टिकी सबकी नजर
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला केवल जांच तक ही सीमित रह जाता है।