Salumbhar Municipal Council: सलूंबर नगर परिषद के 25 वार्डों का नया परिसीमन जारी हुआ है। डाल तिराहा, करगेटा, दूदर की सोनारिया बस्ती और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी अब नगर सीमा में शामिल हैं। नए परिसीमन से पार्षदों और राजनीतिक दलों के समीकरण बदलेंगे।
राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने सलूंबर नगर परिषद के वार्डों के नए परिसीमन की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के तहत नगर परिषद की सीमा में व्यापक परिवर्तन किया गया है। हालांकि वार्डों की संख्या 25 यथावत रखी गई है, परंतु अब कई नए क्षेत्र नगर परिषद की शहरी सीमा में शामिल हो गए हैं।
इस बदलाव का असर न केवल प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा, बल्कि इसका राजनीतिक प्रभाव भी दिखाई देगा। वर्तमान पार्षदों और भावी प्रत्याशियों को अब अपने वार्ड की नई सीमाओं के अनुसार चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी।
नए परिसीमन में विस्तारित हुई नगर सीमा
स्वायत्त शासन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सलूंबर नगर परिषद की सीमा को अब 2005 के मास्टर प्लान के पेराफेरी क्षेत्र तक बढ़ाया गया है। इस विस्तार में कई राजस्व गांवों को शामिल किया गया है, जिससे परिषद का प्रशासनिक क्षेत्रफल पहले की तुलना में अधिक बड़ा हो गया है।
नए राजस्व गांव आए शहरी क्षेत्र में
नए परिसीमन में ग्राम पंचायत डाल के राजस्व ग्राम करगेटा को नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किया गया है। इसी क्षेत्र में डाल तिराहा, कलेक्टर कार्यालय, पुलिस थाना, और जिला पुलिस अधीक्षक का आवास जैसे प्रमुख संस्थान स्थित हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत धारोद के राजस्व ग्राम दूदर की सोनारिया बस्ती और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी को भी अब नगर परिषद क्षेत्र में सम्मिलित कर लिया गया है।
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राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के आसार
परिसीमन के इस बदलाव से नगर परिषद के कई मौजूदा पार्षदों को अब नई सियासी जमीन तैयार करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। जिन वार्डों से वे चुने गए थे, उनमें से कई हिस्से अब अन्य वार्डों में स्थानांतरित हो गए हैं। इससे आगामी नगर निकाय चुनाव में नए समीकरण बनेंगे और कई नेताओं को अपना आधार क्षेत्र फिर से स्थापित करना होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों को मिला शहरी प्रतिनिधित्व का अवसर
नए परिसीमन के बाद जिन राजस्व गांवों को शहरी सीमा में शामिल किया गया है, वहां के निवासियों को अब नगर परिषद चुनावों में भागीदारी का अवसर मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के लिए भी अब शहरी राजनीति में प्रवेश का रास्ता खुल गया है, जिससे परिषद के निर्णयों में नए वर्ग की भागीदारी संभव हो सकेगी।
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