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राजस्थान: सरकारी अस्पताल से दवा चोरी, निजी क्लीनिक से नर्सिंग ऑफिसर गिरफ्तार

Sun, 11 Oct 2026 03:51 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक

सार

राजस्थान के सआदत अस्पताल में सरकारी नशीली और जीवनरक्षक दवाओं की चोरी का मामला सामने आया है। जिला विशेष टीम ने एक निजी क्लीनिक पर कार्रवाई करते हुए सरकारी नर्सिंग ऑफिसर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से सरकारी आपूर्ति की दवाएं बरामद करने की बात कही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले के सबसे बड़े सरकारी सआदत अस्पताल में नशीली और जीवनरक्षक दवाओं की खुलेआम चोरी का मामला सामने आया है। पुलिस की जिला विशेष टीम (डीएसटी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए निजी क्लीनिक से सरकारी नर्सिंग ऑफिसर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में सरकारी आपूर्ति की प्रतिबंधित नशीली दवाओं और जीवनरक्षक औषधियों का बड़ा जखीरा बरामद किया है। ये दवाएं केवल सरकारी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।
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निजी क्लीनिक पर छापेमारी और बड़ी गिरफ्तारी
प्रतिबंधित नशीली दवाओं की चोरी और उनके अवैध कारोबार की गुप्त सूचना मिलने पर जिला विशेष टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस टीम ने एक निजी क्लीनिक पर अचानक छापा मारा, जहां से सरकारी नर्सिंग ऑफिसर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से सरकारी अस्पताल में सप्लाई होने वाली जीवनरक्षक और नशीली दवाओं की खेप जब्त की। इस पूरी छापामार कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार चिकित्सा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। किसी भी अधिकारी के न पहुंचने से इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार में अस्पताल के अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।

स्टोर के बाहर कचरे में पड़ीं जीवनरक्षक दवाएं
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि जहां एक तरफ सरकारी अस्पताल से नशीली और महंगी दवाएं चोरी होकर निजी क्लीनिक में बेची जा रही थीं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के स्टोर के बाहर जीवनरक्षक दवाएं लावारिस पड़ी हुई हैं। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए आई ये दवाएं बिना किसी सुरक्षा के खुले में कचरे की तरह फेंक दी गई हैं। इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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पीएमओ का गैर-जिम्मेदाराना बयान और जांच का दावा
इस मामले में जब सआदत अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) प्रतीक सालोदिया से बातचीत की गई, तो उनका जवाब गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उन्हें इस दवा चोरी की जानकारी खुद नहीं थी, बल्कि यह बात उन्हें सोशल मीडिया के जरिये पता चली है। उन्होंने केवल इतना कहा कि वे अब दवाओं के बैच नंबर की जांच करवाकर यह पता लगाएंगे कि ये दवाएं उनके अस्पताल की हैं भी या नहीं।
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