राजस्थान के झालावाड़ जिले के खानपुर में नाले से मिले सफाईकर्मी राकेश वाल्मीकि के शव को सांगोद पहुंचाने के लिए परिजनों को नगरपालिका के कचरा वाहन का सहारा लेना पड़ा। अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं था। परिजनों के अनुसार, शव की खराब स्थिति और तेज दुर्गंध के कारण निजी वाहन चालक भी उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए।
झालावाड़ जिले के खानपुर में नाले से मिले सफाई कर्मचारी के शव को सांगोद पहुंचाने के लिए परिजनों को नगरपालिका के कचरा वाहन का सहारा लेना पड़ा। शव की अत्यधिक खराब स्थिति और तेज दुर्गंध के कारण किसी भी निजी वाहन चालक ने उसे ले जाने की सहमति नहीं दी। अस्पताल परिसर में अलग से शव वाहिनी की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण परिजनों को यह कठोर कदम उठाना पड़ा। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इसकी तीव्र चर्चा होने लगी और परिजनों की यह लाचारी देखकर अस्पताल में उपस्थित लोग भावुक हो गए।
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नाले में मिला लापता सफाईकर्मी का शव
सांगोद निवासी सांगोद नगरपालिका का सफाई कर्मचारी राकेश वाल्मीकि 7 अक्तूबर को बिना किसी को सूचना दिए घर से चला गया था। परिजनों के अनुसार वह पूर्व में भी कई बार इसी प्रकार बिना बताए घर से चला जाता था। पिछली घटनाओं को देखते हुए परिवार के सदस्यों ने इस बार भी पुलिस में कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। 9 अक्तूबर को खानपुर पुलिस को खानपुर की अनाज मंडी के निकट एक नाले में राकेश का शव पड़ा मिला। पानी और नाले में रहने की वजह से शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी और उसमें से काफी तेज दुर्गंध आ रही थी।
निजी वाहन चालकों ने ले जाने से किया मना
शनिवार को पुलिस ने परिजनों को राकेश का शव मिलने की आधिकारिक सूचना दी। जानकारी प्राप्त होते ही परिवार के लोग तुरंत खानपुर पहुंचे। खानपुर पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया और सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के उपरांत शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इसके पश्चात परिजन शव को सांगोद ले जाने के लिए वाहन का प्रबंध करने में जुट गए। परिजनों ने निजी गाड़ियों से संपर्क साधा, किंतु शव से उठती तीव्र दुर्गंध के कारण कोई भी चालक तैयार नहीं हुआ। मजबूर होकर परिजनों को सांगोद नगरपालिका के कचरा वाहन से शव लाना पड़ा।
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एंबुलेंस नहीं मिली
क्षेत्रीय वार्ड पार्षद राकेश कुमार ने बताया कि एंबुलेंस नहीं मिलने से परिजनों ने कई निजी वाहनों से बातचीत की थी, लेकिन शव की स्थिति ज्यादा खराब होने से कोई वाहन मालिक तैयार नहीं हुआ। अस्पताल प्रभारी डॉ. धीरेन्द्रगोपाल मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में अलग से शव वाहिनी की व्यवस्था नहीं है और 104 व 108 एंबुलेंस शवों को लेकर नहीं जाती हैं, जिसके चलते परिजन स्वयं गाड़ी लेकर आए थे। वहीं थानाधिकारी रविन्द्र सिंह के अनुसार शव ले जाने का प्रबंध परिजनों का ही रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही हो सकेगा।