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Rajasthan News: बजट घोषणाओं को पूरा करने लिए DMFT फंड; पीडब्लूडी के ACS की चिट्ठी पर छिड़ा विवाद

Mon, 18 May 2026 03:28 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान सरकार द्वारा PWD बजट घोषणाओं के लिए DMFT फंड से प्रस्ताव मांगे जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इसे खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों और DMFT नियमों के खिलाफ बताते हुए सरकार पर वित्तीय संकट छिपाने का आरोप लगाया है।

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राजस्थान विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य सरकार के पीडब्लूडी महकमे के अतिरिक्त मुख्य सचिव की एक चिट्ठी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के एसीएस प्रवीण गुप्ता ने पीडब्लूडी बजट घोषणाओं को पूरा करने के लिए माइनिंग फंड डीएमएफटी से पैसा मांगा है। उन्होंने इस चिट्ठी के माध्यम से सभी जिला कलेक्टर्स और अधीक्षण अभियंताओं को निर्देश जारी कर बजट घोषणाओं के प्रस्ताव DMFT मद से स्वीकृत कराने को कहा है। 

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इधर राज्य सरकार अप्रैल के पहले महीने में राजस्व संग्रह बेहतर होने का दावा कर रही है। सरकार ने पहले महीने के टैक्स कलेक्शन के जो आंकड़े जारी किए हैं, उनमें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों से 15 हजार 20 करोड़ रुपए की आमदनी होना बताया गया है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में टैक्स कलेक्शन 13162 करोड़ रुपए रहा था। इसके बावजूद भी इस साल पहले महीने का खर्च चलाने के लिए सरकार ने बाजार से 8 हजार 700 करोड़ रुपए से ज्यादा का उधार भी लिया है। 

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14 हजार 862 करोड़ पीडब्लूडी का बजट

राज्य सरकार ने इस बजट में पीडब्लूडी से जुड़े कामों के लिए कुल 14 हजार 862 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। विभाग की बजट घोषणाओं के अनुसार इस राशि में सेस्टेट हाइवेज, ROB/RUB, फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड और पुलों के निर्माण, मरम्मत व उन्नयन पर करीब 1800 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।

  • खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों के सुधार के लिए 1400 करोड़ रुपए तथा मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
  • 250 अटल प्रगति पथ परियोजनाओं पर करीब 500 करोड़ रुपए के कार्य प्रस्तावित हैं।
  • औद्योगिक क्षेत्रों और लॉजिस्टिक पार्क्स तक पहुंच मार्ग विकसित करने पर 400 करोड़ रुपए का प्रावधान है।
  • मानसून के बाद सड़कों की मरम्मत और पुनर्स्थापन के लिए 500 करोड़ रुपए का अलग प्रावधान किया गया है।
  • 1000 किलोमीटर से अधिक सड़कों को राज्य राजमार्ग (State Highways) में उन्नत किया जाना है।
  • 2000 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मुख्य जिला मार्ग (MDR) में क्रमोन्नत किया जाना है।

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DMFT फंड को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
DMFT फंड खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए बनाया गया एक विशेष कोष है, जिसे जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में और निर्धारित समिति की स्वीकृति से खर्च किया जाता है। इससे पहले भी कई मौकों पर इस फंड के उपयोग और प्राथमिकताओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

पिछले वर्षों में भी DMFT के उपयोग को लेकर यह मुद्दा उठता रहा है कि क्या इसे केवल खनन प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित रखा जाए या राज्य की अन्य विकास योजनाओं से जोड़ने की अनुमति दी जाए।

प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल
विपक्ष का कहना है कि DMFT फंड का निर्णय जिला स्तरीय समिति और जनप्रतिनिधियों की सहमति से होना चाहिए, जबकि इस बार इसके उपयोग को लेकर उच्च स्तर से निर्देश जारी होने की बात सामने आ रही है। इस पर प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

डोटासरा बोले-घोषणाओं में बजट प्रावधान नहीं, नियम विरुद्ध फंड का इस्तेमाल

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार बजट में बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन उनके लिए पर्याप्त बजट प्रावधान नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार अपने वित्तीय दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक फंडों का उपयोग कर रही है, जो तय नियमों और मूल उद्देश्यों के खिलाफ है।
डोटासरा ने कहा कि DMFT जैसे फंड का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए होना चाहिए, न कि बजट घोषणाओं की पूर्ति के लिए। उन्होंने इस मामले की पारदर्शी जांच की मांग भी की है।

 

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