कभी सुगम यात्रा की प्रतीक मानी जाने वाली राजस्थान पथ परिवहन निगम (रोडवेज) इन दिनों ‘हादसों की बस’ बनने लगी है। प्रदेश में आए दिन कहीं न कहीं रोडवेज की बस दुर्घटनाग्रस्त हो रही है और इसमें सफर करने वाले यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है। इसके चलते रोडवेज में सफर करने वाले यात्रियों को हर समय अनजान भय सताती रहती है।
हालांकि देखा जाए तो निजी बसों की तुलना में रोडवेज की बसों से दुर्घटना के मामले काफी कम हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के दौरान रोडवेज हादसों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया है। इसके पीछे जो मुख्य वजह सामने आई वह है, रोडवेज बस की चेकिंग के लिए अचानक सड़क पर प्रकट होने वाली फ्लाइंग स्क्वॉड। बस चलाते समय रोडवेज चालक हर समय फ्लाइंग की लोकेशन जानने के लिए अपने सूत्रों से मोबाइल पर बातचीत करता रहता है। इससे चालक का ध्यान भंग हो जाता है और रोडवेज बस दुर्घटना का शिकार हो जाती है।
23 घंटे में हुई 16 की मौत
बीते 8 जुलाई को बीकानेर-श्रीगंगानगर राजमार्ग पर जामसर कस्बे के पास यात्रियों से भरी रोडवेज बस सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी की पांच युवतियों की मौत हो गई जबकि 22 लोग घायल हो गए। टक्कर के समय रोडवेज चालक मोबाइल पर बात कर रहा था और ध्यान भंग होने से बस सड़क किनारे खड़े टैंकर से जा टकराई।
मृतक पांचों युवतियां नेट की परीक्षा देकर अपने घर लौट रही थी। इसी दिन अजमेर जिले के मांगलियावास थाना इलाके में तबीजी के पास पाली डिपो की रोडवेज बस और एक डंपर में जबर्दस्त भिड़ंत हो गई थी। उस हादसे में बस में सवार सात यात्रियों की मौत हो गई और 21 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसी तरह 9 जुलाई को आगरा-बीकानेर नेशनल हाईवे पर दौसा के रेटा के समीप हुए भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए। हादसा रोडवेज बस और लोक परिवहन सेवा की बस टकराने से हुआ। तीनों हादसों में रोडवेज बस दुर्घटना का शिकार हुई है।
चालक की रही लापरवाही
हालांकि रोडवेज को वर्ष 2009 से 2013 तक न्यूनतम दुर्घटना के लिए भारतीय स्टेट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (एटीयू) से ट्राफी और नकद पुरस्कार भी मिले चुके हैं। साथ ही वर्ष 2015-16 में भी रोडवेज बसों की प्रति एक लाख किलोमीटर पर दुर्घटना दर 0.06 रही है। इसके बावजूद परिचालकों की लापरवाही, लगातार ड्यूटी का मानसिक तनाव, अवकाश कम मिलना, चालक द्वारा शराब और अन्य प्रकार के नशे का सेवन कर बस चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति के चलते कुछ समय से रोडवेज की बसों से गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी है जिससे बेकसुर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।
राजस्थान रोडवेज के वार्षिक प्रतिवेदन 2017 के अनुसार प्रदेश में 52 आगार कार्यालयों से रोडवेज की 4343 बसें, 186 अनुबंधित बसें संचालित की जा रही है। इन बसों में 9 लाख 25 हजार 622 यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष 2015-16 में 129 प्राणघातक दुर्घटना, 42 बड़ी,151 छोटी एंव अन्य घटनाओं को मिलाकर कुल 322 सड़क दुर्घटनाएं रोडवेज की बसों से हुई है। रोडवेज सूत्रों के अनुसार इन दुर्घटनाओं के पीछे चालक की लापरवाही सामने आई है।