राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) 2023 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। ये ऐलान रविवार को पार्टी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की। सांसद बेनीवाल ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ खड़ी पार्टियों के लिए हमारे रास्ते खुले हैं। इस चुनाव में गठबंधन हो सकता है। जनता का कांग्रेस और भाजपा दोनों से मोह भंग हो चुका है।
रविवार को भीलवाड़ा जिले के दौरे पर रहे सांसद बेनीवाल ने गणेशपुरा में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में आरएलपी की योजना को लेकर भी अपनी बात रखी। बेनीवाल ने कहा कि इस बार सभी सीटों पर आरएलपी चुनाव लडे़गी और भाजपा व कांग्रेस दोनों को सबक सिखाएगी। सांसद ने कहा, सत्ता में आने का सपना देख रही भाजपा भी इस बार वेंटिलेटर पर रहेगी, क्योंकि सरदारशहर विधानसभा के उप चुनाव के परिणाम ने यह फिर से बता दिया कि आरएलपी ही प्रदेश में तीसरी सबसे बड़ी ताकत है।
सांसद बेनीवाल ने गहलोत और वसुंधरा पर जुबानी हमला बोलते हुए कहा कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 72 गुर्जरों को गोलियों से भूना गया। पानी के आंदोलित किसानों पर रावला घड़साना में गोलियां चलाईं गईं और कई जातियों को आपस में वसुंधरा ने लड़वाया, लेकिन गहलोत ने उस लड़ाई को समाप्त करवाने के स्थान पर उसपे मुहर लगाई।
राजस्थान में पेपर लीक को लेकर सांसद ने कहा कि सरकार में बैठे लोगों की शह के बिना पेपर लीक असंभव है। जिस तरह कोचिंग संचालकों के तार सीएमओ तक जुड़े होने की बात सामने आई, सीएम गहलोत ने विधायकों को खुली लूट की छूट दे रखी है। उससे यह साफ है सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करेगी।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने जिंदल सहित खनन क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न कंपनियों को भी अपने संबोधन में आड़े हाथों लिया। सांसद ने कहा कि इन कंपनियों की वजह से यहां भूजल स्तर गिर गया। स्थानीय लोगों को यहां रोजगार नहीं मिल रहा है। इसका प्रमुख कारण है कि यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के नेता ऐसी कंपनियों के मुनीम बन गए।
बेनीवाल ने भीलवाड़ा जिले के कई नेताओं का नाम लिए बिना कहा की आज वो नेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन 2018 के चुनाव में वे नेता जीतने के लिए उनके दरवाजे पर आए थे। उन्होंने भी सामाजिक लिहाज से दर्जनों नेताओं की मदद की, लेकिन इस बार आरएलपी सभी सीटों पर चुनाव लडे़गी और बड़ी बड़ी बातें करने वाले नेता मैदान छोड़कर भागते हुए नजर आएंगे।