राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार के प्रारंभ महंगाई राहत कैंपों को दिखावा बताया। उन्होंने कहा लाभार्थियों का रिकॉर्ड सरकार के पास है, तो पंजीयन के नाम पर जनता को क्यों तंग किया जा रहा है? सांसद ने कहा- जब लाभार्थियों के रिकॉर्ड और उनसे जुड़ी सूचना सरकार के पास मौजूद हैं, तब महंगाई राहत शिविर में पंजीयन के नाम पर लोगों को अनावश्यक परेशान क्यों किया जा रहा है?
सांसद बेनीवाल ने कहा कि प्रदेश भर में कर्मचारियों की हड़ताल के मध्य सोमवार से महंगाई राहत शिविर शुरू हो गए। सरकार की विभिन्न योजनाओं में लाभ प्राप्त करने वालों को इन शिविरों में पंजीयन करवाना अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार के पास लाभार्थियों का रिकॉर्ड पहले से ही मौजूद है, तो इन शिविरों में अनिवार्य पंजीयन क्यों करवाया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रसोई गैस का सिलेंडर 500 रुपए में लेने वालों को भी पंजीयन करना अनिवार्य है, लेकिन पांच सौ रुपए में सिलेंडर उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिन्हे केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना में कनेक्शन मिला है। जबकि सरकार के पास उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की सूची पहले है। ऐसे में सरकार चाहे तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही 500 रुपये वाली सुविधा दे सकती है।
100 यूनिट बिजली फ्री करने के मामले में भी सभी विद्युत वितरण निगमों के पास घरेलू उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड उपलब्ध है, किसानों को 2000 यूनिट बिनली प्रतिमाह फ्री देनी है तो उनका भी रिकॉर्ड सरकार के पास पहले से ही है। इसी प्रकार सामाजिक सुरक्षा में पेंशन भी जिन व्यक्तियों को मिल रही है, उसका रिकॉर्ड भी सरकार के पास है और खाद्य सुरक्षा योजना का डाटा भी सरकार के पास है।
बावजूद इसके कैंप के नाम पर सरकारी तंत्र के माध्यम से आगामी चुनाव को देखते हुए गहलोत खुद की ब्रांडिंग करवाने की मंशा से यह करवा रहे और भीषण गर्मी में जनता को कैंपों में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
महंगाई कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए सरकार
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा- राज्य सरकार को पेट्रोल डीजल पर लिए जाने वाले राज्य करों में और कटौती करके और महंगाई कम करने के लिए अन्य जरूरी कदम उठाने की जरूरत है ताकि प्रदेश के लोगों को राहत मिल सकें।