जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोले सांसद शशि थरूर।
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में 'लीगेसी ऑफ वायलेंस' सेशन में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा- ब्रिटेन में भले ही एक ब्राउन मैन प्रधानमंत्री बन गया हो, लेकिन अभी भी वहां नस्लभेद खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- अब एक भारतीय मूल का व्यक्ति बिशप को नॉमिनेट करेगा, जबकि वह खुद क्रिश्चियन नहीं, बल्कि हिन्दू है।
ऋषि सुनक का चुनाव ब्रिटेन की घरेलू राजनीति में बदलाव
थरूर ने कहा- ब्रिटिशराज में अंग्रेजों ने भारत में माफिया राज पनपाया था। उस वक्त उन्होंने भारत में खूब लूट-पाट की, जलियांवाला बाग कांड को अंजाम दे दिया। जो कभी भी इतिहास में भुलाया नहीं जा सकता है। अब ब्रिटेन के पॉलिटीशियंस को यह समझ में आ गया है कि मौजूदा हालातों में उन्हें कोई अश्वेत व्यक्ति ही आर्थिक संकट से बाहर निकाल सकता है। यही कारण है कि ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गए। उन्होंने कहा ऋषि सुनक का चुनाव ब्रिटेन की घरेलू राजनीति में बदलाव को दर्शाता है।
अश्वेत कैरेबियन महिला का चयन कोरियोग्राफी
थरूर ने कहा- लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ब्रिटिश राजनीति में रंग विशेष के लोग अक्सर रूढ़िवादी होते हैं। एल्किंस के अनुसार- यहां तक कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद उसकी घोषणा करने के लिए भी एक अश्वेत कैरेबियन महिला का चयन भी कोरियोग्राफ किया गया मामला था। जिसका उद्देश्य सभ्यता मिशन की सफलता को दिखाना था।
ब्रिटिश साम्राज्य ने डराने-धमकाने के लिए 'वैध हिंसा' की
शशि थरूर ने बताया कैसे भारत में साम्राज्य को बनाए रखने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य ने डराने-धमकाने और "वैध हिंसा" का सहारा लिया। उन्होंने औपनिवेशिक भारत में हिंसा के कई उदाहरणों पर चर्चा की, जिसमें जलियांवाला बाग हत्याकांड भी शामिल था। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य में उपनिवेशवाद संस्थागत हिंसा के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा था। एल्किन्स ने इन विचारों में योगदान दिया है कि कैसे औपनिवेशिक अधिकारी जो इस तरह की हिंसा में लिप्त थे, वह थाईलैंड से केन्या और फिलिस्तीन तक के क्षेत्रों में चले गए। उन्होंने फिलिस्तीन के उपनिवेशीकरण और उससे पहले के हालातों पर भी चर्चा की। थरूर ने कहा- इस हिंसा के सबूतों को आमतौर पर मिटा या जला दिया गया था।
तब उदार साम्राज्यवाद की विचारधारा में बहुत ज्यादा हिंसा शामिल थी
कांग्रेस नेता शशि थरूर के साथ हार्वर्ड विश्वविद्यालय में इतिहास और अफ्रीकी और अफ्रीकी-अमेरिकी स्टडी की प्रोफेसर कैरोलीन एल्किंस ने संवाद किया। कैरोलीन एल्किंस ने अपनी नई किताब, "लिगेसी ऑफ वॉयलेंस: ए हिस्ट्री ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर" के बारे में बातचीत करते हुए ब्रिटिश साम्राज्य के वैश्विक इतिहास, इसके हिंसक कामों, ब्रिटेन के खिलाफ दायर कानूनी मामले और दक्षिण एशिया में ब्रिटिश राज के हालातों पर चर्चा की। अपनी किताब के जरिए एल्किन्स ने कहा कि 1857 में भारत और 1954 में केन्या में हिंसा की औपनिवेशिक घटनाओं में जो कुछ हुआ, मैंने उसके बिंदुओं को जोड़ने की उम्मीद से किताब लिखी है। वास्तव में तब उदार साम्राज्यवाद की विचारधारा में बहुत ज्यादा हिंसा शामिल थी।