श्रीनाथजी का ऋतु का अंतिम सेहरा शृंगार दर्शन
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पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में श्रावण कृष्ण पंचमी के अवसर पर ठाकुरजी का ऋतु का अंतिम सेहरा शृंगार किया गया। सखियों के साकेत वन में प्रभु को सेहरा धारण कराने की लीला-भावना के अनुरूप मनोहारी शृंगार सजाया गया। अमरसी पिछोड़ा, छज्जेदार पाग और हीरा-माणक जड़ित सेहरे से सुसज्जित श्रीनाथजी के दर्शन कर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
प्रभु को वनमाला का शृंगार, फिरोजी रंग के आभूषण, मकराकृति कुंडल तथा कस्तूरी, कमल और श्वेत पुष्पों की मालाएं धारण कराई गईं। मेघश्याम रंग के वस्त्र और रूपहली जरी की किनारीयुक्त पटका ने शृंगार की भव्यता को और बढ़ा दिया।
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इस अवसर पर हवेली में लग्न मंडप के चित्रांकन से सजी विशेष पिछवाई सजाई गई। इसमें श्री ठाकुरजी, श्री स्वामीनीजी और श्री यमुनाजी के सेहरा शृंगार के साथ सखियों द्वारा मंगल गीत गाने की भाव-लीला का सुंदर चित्रण किया गया। वहीं स्वर्ण जड़ित चौकी पर भी विशेष सजावट की गई।
संध्या आरती के दौरान कमल चौक में श्रीनाथजी के प्रतिनिधि स्वरूप श्री मदनमोहनलालजी को गुलाब एवं अन्य पुष्पों से सुसज्जित हिंडोले में विराजमान कर श्रद्धापूर्वक हिंडोला झुलाया गया। उन्हें भी श्रीनाथजी की तरह सेहरा और अमरसी मलमल के रूपहली किनारीयुक्त वस्त्र धारण कराए गए।
वन-उपवन की आकर्षक सजावट के बीच कीर्तनकारों ने "दूल्हे-दुल्हन संग झूलत" और "झूलत लाल हे दूल्हा-दुल्हन" सहित अनेक भक्तिमय कीर्तनों का गायन किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत वातावरण बना रहा। दर्शन के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव श्रद्धालु उमड़े।