राजस्थान विधानसभा में सोमवार को एक मंत्री की ‘प्रश्न पूछने की मंशा’ संबंधी टिप्पणी को लेकर हंगामा हुआ और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के विधायक नारेबाजी करते हुए आसन के सामने धरने पर बैठ गए। विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही भी लगभग आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
प्रश्नकाल के दौरान यह हंगामा उस समय शुरू हुआ जब पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह आरटीडीसी होटलों को निजी कंपनियों को देने की योजना संबंधी सवाल का जवाब दे रहे थे। भाजपा विधायक कालीचरण सर्राफ के पूरक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि पुरातत्व व संग्रहालय विभाग के अधीन गढ़ तथा किलों का संचालन व रखरखाव निजी कंपनियों द्वारा कराए जाने का विचार नहीं है और इस संबंध में सरकार के स्तर पर कोई निर्णय नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि पीपीपी परियोजनाओं को लेकर 29 अप्रैल 2019 को मुख्य सचिव के स्तर पर हुई पीपीपी संबंधित बैठक के समय राज्य में आचार संहिता लागू थी। ऐसे निर्णय सरकार के स्तर पर किए जाते हैं।
इसके साथ ही विश्वेंद्र सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि 'यह सवाल पूछने के पीछे विधायक की मंशा क्या है?' इस पर हंगामा शुरू हो गया। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया व उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि 'मंत्री महोदय ही बता दें कि हमारी मंशा क्या है?'
पक्ष विपक्ष में नोंक झोंक के बीच कटारिया व उपनेता राजेंद्र राठौड़ की अगुवाई में भाजपा के विधायक आसन के सामने आकर नारेबाजी करने लगे और धरने पर बैठ गए। भाजपा विधायकों ने 'अध्यक्ष जी न्याय करो', 'मंत्री जी माफी मांगो' व 'सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी' के नारे लगाए। नारेबाजी व हंगामे के बीच प्रश्नकाल जारी रहा।
अध्यक्ष सीपी जोशी ने भाजपा के सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की लेकिन वे अपने प्रदर्शन पर अड़े रहे। इस कारण बाद में ज्यादातर प्रश्नों का उतर नहीं दिया गया और अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।