Rajasthan Political Crisis: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान को लेकर नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं। गहलोत गुट की एक विधायक के दावे ने सबको चौंका दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विधायक इंदिरा मीणा ने कहा, शनिवार रात को हमें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाया गया था, लेकिन रविवार को नए निर्देश मिले। कहा गया कि मंत्री शांति धारीवाल के घर आना है। वहां पहुंचने के बाद एक कागज पर हस्ताक्षर करा लिए थे, पता नहीं था कि वह कागज क्या है। विधायक मीणा ने कहा सचिन पायलट का कोई विरोध नहीं है, अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो हमारे लिए अच्छा रहेगा।
जयपुर के बगरू से विधायक गंगा देवी ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि वह बैठक में शामिल होने के लिए सीपी जोशी के आवास पर गईं थीं, लेकिन देरी से पहुंचने के कारण न तो उन्हें कोई चिट्टी मिली न ही उन्होंने किसी कागज पर हस्ताक्षर किए। मैंने इस्तीफा नहीं दिया है। विधायक गंगा देवी ने कहा, वह कांग्रेस के साथ हैं। आलाकमान के निर्देश सर्वोपरि हैं, वह किसी भी मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के विरोध में नहीं हैं।
कांग्रेस विधायक केएल बैरवा ने भी प्रदेश में चल रहे सियासी घटनाक्रम को लेकर सख्त टिप्पणी की। बैरवा ने कहा, आलाकमान सीएम उम्मीदवार को लेकर फैसला करे। उन्होंने कहा कि जब सीएम हाउस में बैठक होनी थी तो अलग से एक और बैठक क्यों बुलाई गई। क्या यह बगावत नहीं है। ऐसी घटना के बाद अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कोई संभावना नहीं है।
ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा ने कहा कि मंत्री महेश जोशी ने उन्हें बैठक में बुलाया था, लेकिन वह खुद नहीं आए। यह कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि अनुशासनहीनता है। मैं आज तक किसी भी गुट में शामिल नहीं रही हूं, मैं पार्टी और आलाकमान के साथ हूं, जो भी घटनाक्रम हुआ वो अनुशासनहीनता है।
सियासी घटनाक्रम पर सचिन पायलट गुट के विधायक की भी प्रतिक्रिया आई सामने आ गई है। विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा ने कहा, जो कल हुआ वो बगावत थी। बगावत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आलाकमान को कमजोर समझना उनकी बड़ी भूल है। बच्चा भी जनता है कि अब गहलोत अध्यक्ष नहीं बन पाएंगे।