राजस्थान में पंचायत चुनाव में इस बार चुनाव मैदान में कई अनूठे और दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल रहे हैं। इन चुनावों में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके प्रत्याशी से लेकर विदेशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नौकरी के प्रस्ताव ठुकराकर गांव लौटने वाले उच्च शिक्षित युवा अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ आपराधिक मामले में जेल में बंद एक महिला प्रत्याशी भी सलाखों के पीछे से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में डटी हुई हैं।
सिविल सेवा से राजनीति का रुख
बाड़मेर जिले की बायतु पंचायत समिति के वार्ड संख्या तीन से 33 वर्षीय जसवंत सिंह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जसवंत सिंह ने वर्ष 2013 में यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी, हालांकि वह मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल नहीं कर सके। संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में चयन न होने के बाद उन्होंने अपने पिता का परिवहन व्यवसाय संभालना शुरू कर दिया।
जसवंत का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बनना था, लेकिन अब वह राजनीति के माध्यम से जनसामान्य के अधिकारों की लड़ाई लड़ने और सेवा करने का इरादा रखते हैं। इस मुकाबले में उनके सामने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में कांग्रेस के उम्मीदवार ठाकराराम मैदान में हैं, जो स्नातक उत्तीर्ण हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के उम्मीदवार गोकलाराम भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो पांचवीं कक्षा तक पढ़े हैं।
विदेश का अवसर छोड़ गांव लौटे
बीकानेर जिले के गिराजसर निवासी फतेह राज भी पंचायत चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। फतेह राज जिला परिषद के वार्ड संख्या पांच से भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे हैं। फतेह राज ने बेंगलुरु स्थित अमृता यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने पावर सेक्टर तथा ऑयल एंड गैस क्षेत्र में लगभग सात वर्षों तक नौकरी की। उन्होंने विदेशों में जाकर नौकरी करने के बजाय अपने ही गांव में रहकर जनसेवा करने का फैसला किया।
जेल से निर्दलीय पर्चा दाखिल
नागौर जिले में जिला परिषद के वार्ड संख्या 32 से बसंती जेल में रहते हुए चुनाव लड़ रही हैं। उन पर वर्ष 2021 की खरीफ फसल के दौरान फर्जी कागजात तैयार करके प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम राशि हड़पने का आरोप है। इस मामले में बसंती पर 2 लाख 28 हजार रुपये की क्लेम राशि हड़पने का आरोप है। धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उनका टिकट रद्द कर दिया था।
इसके बावजूद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर रखा है। पुलिस ने बसंती और उनके पति बीरबलराम कमेड़िया को 13 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को 14 अक्तूबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने बसंती को 16 अक्तूबर तक और बीरबलराम को 19 अक्तूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।