राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और वन विभाग में स्टाफ की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए वनरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अभयारण्य में अवैध खनन रोकने और वन्यजीव संरक्षण के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ की तत्काल जरूरत है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों से पहले दिए गए निर्देशों के पालन की स्थिति पर जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध खनन और पर्यावरणीय नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि अवैध खनन रोकने के लिए संवेदनशील मार्गों की पहचान कर ली गई है। इनमें चंबल अभयारण्य के 40 रूट शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हाई रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए बजट मंजूर कर दिया गया है और एक साल के भीतर काम पूरा कर लिया जाएगा।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने वन विभाग में स्टाफ की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित वनरक्षकों की कमी के कारण होमगार्ड्स से वन विभाग का काम कराया जा रहा है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा कि खाली पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्य के वन अधिकारियों ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजा गया है और वनरक्षकों की भर्ती पूरी होने में करीब एक साल लग सकता है। इस पर कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों को भी अवैध खनन में शामिल बड़े आरोपियों पर कार्रवाई तेज करने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल वाहन चालकों और हेल्परों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
गौरतलब है कि 14 मई को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की कार्यशैली को प्रशासनिक उदासीनता और संस्थागत निष्क्रियता बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने अवैध खनन से चंबल अभयारण्य और वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर गंभीर चिंता भी व्यक्त की थी।