राजस्थान में आपने दलितों की बिंदोरी रोकने की कई घटनाएं सुनी होंगी, लेकिन आज हम बात करेंगे एक ऐसे परिवार की जिसमें तमाम सामाजिक कुरीतियों को पीछे छोड़ दिया। दलित और सवर्ण के उस भेद को मिटाने की कोशिश की जो कई बर्षों से हमारे समाज में बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं अमजेर के केकड़ी में रहने वाले एक राजावत (राजपूत) परिवार की। इस परिवार के सदस्यों ने दलित दूल्हे का स्वागत कर बारातियों और घरातियों के लिए खाने-पीने का प्रबंध किया। साथ ही दलित बेटी की शादी में कई तरह की जिम्मेदारियां भी बढ़-चढ़कर निभाईं।
आईए...अब विस्तार से बताते हैं सामाजिक समरता की ये कहानी
अजमेर के केकड़ी के गांव बलिया में रहने वाले धर्मराज हरिजन की बेटी की शादी शुक्रवार हो हुई। टोंक के रहने वाले अजय हरिजन घोड़ी पर चढ़कर दुल्ह हो लेने पहुंचे। यहां राजावत परिवार के ठाकुर गोपाल सिंह राजावत, भंवर चेतन सिंह राजावत ने दूल्हे के साथ सभी बारातियों का धूमधाम से स्वागत किया। बारातियों के लिए नास्ते से लेकर खाने तक के कई प्रबंध राजावत परिवार ने किए।
भंवर चेतन सिंह राजावत ने कहा कि बारात का स्वागत करने के पीछे उनका उद्देश्य सिर्फ पुरानी कुरीतियों को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि शहर भले ही आगे बढ़ रहे हो, लेकिन गांवों में आज भी छोटी-छोटी बातों पर सवर्ण-दलितों में टकराव की स्थितियां बनती है। इस तरह के विवाद से दोनों समाज ही अपमानित भी होते है। इस तरह की पहल से लोगों में अच्छा संदेश जाएगा और वे भी अपनी सोच बदलेंगे।
बेटियों को हर क्षेत्र में दिए जाएं अधिकार
ठाकुर गोपाल सिंह ने अपनी पोत्री रुद्राक्षी राजावत का जन्मदिन गरीबों को कंबल बांटकर मनाया था। इस तरह के कई काम वे समय समय पर करते रहते हैं। रुद्राक्षी के पिता भंवर चेतन ने कहा कि अब ऐसो कोई क्षेत्र नहीं जहां बेटियां बेटों से पीछे हों। बेटियां हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। लोगों को सोच बदलकर बेटियों को अधिकार देने चाहिए। उनके बिना इस संसार की कल्पना भी अधूरी है।