राजस्थान में 13 अगस्त को मानसून की गतिविधियां जारी रहेंगी, लेकिन बारिश की तीव्रता में पहले के मुकाबले कमी आने का संकेत है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने राज्य के किसी भी हिस्से में भारी या अतिभारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि, आकाशीय बिजली और मेघगर्जन को लेकर प्रशासन व आम जनता को सतर्क किया गया है। पूर्वी राजस्थान के सभी जिलों तथा पश्चिमी राजस्थान के दो जिलों को मिलाकर कुल 30 जिलों में वज्रपात और गर्जना का येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। खराब मौसम के दौरान बिजली गिरने की आशंका के कारण विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
चार संभागों में बारिश के आसार, पश्चिमी राजस्थान में कम होगी गतिविधि
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभागों में मौसम का असर अधिक दिखाई देगा। इन क्षेत्रों के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने या बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभागों में बारिश का दायरा बेहद सीमित रहेगा। यहां केवल कुछ स्थानों या कहीं-कहीं वर्षा होने की संभावना है। पूरे पश्चिमी भाग में एक साथ बारिश नहीं होगी। मौसम का यह बदला हुआ रुख संकेत दे रहा है कि प्रदेश में बारिश का दौर अब धीमा हो रहा है।
30 जिलों में वज्रपात और मेघगर्जन का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने प्रदेश के 30 जिलों में बारिश के साथ वज्रपात और मेघगर्जन का येलो अलर्ट घोषित किया है। इसमें पूर्वी राजस्थान के 28 जिले शामिल हैं- अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, डीग, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, टोंक और उदयपुर। पश्चिमी राजस्थान में केवल जालोर और पाली जिले को इस अलर्ट श्रेणी में रखा गया है, जहां गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है।
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11 जिलों में कोई चेतावनी नहीं
पश्चिमी राजस्थान के शेष 11 जिलों यानी बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, फलोदी और श्रीगंगानगर के लिए 13 अगस्त को कोई अलर्ट या चेतावनी जारी नहीं की गई है। आने वाले दिनों में बारिश के और अधिक घटने के आसार हैं। मौसम केंद्र के अनुसार 14 अगस्त के बाद से पश्चिमी राजस्थान में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ जाएंगी। इसके बाद 15 अगस्त से पूर्वी राजस्थान के क्षेत्रों में भी मानसूनी गतिविधियों में कमी आएगी और वर्षा की तीव्रता घटेगी।