राजस्थान विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार के बाद सदन में नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है कि विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता बन सकते हैं। विधानसभा सत्र बुलाने के मामले में मेघवाल की आपत्ति को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है।
ऐसा पहली बार हुआ है जब विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र शुरू करने पर आपत्ति जाहिर की है। इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
मेघवाल ने कहा कि उनसे सलाह मशवरा किए बिना ही विधानसभा सत्र आहूत कर ली गई। उन्होंने कहा, "सत्र बुलाने के लिए नोटिस जारी करने का अधिकार मेरे आदेश से सचिव को होता है और मैंने सचिव को नोटिस जारी करने के आदेश नहीं दिए।"
मेघवाल ने कहा कि विधानसभा के नियमों की पत्रावली में ये साफ तौर पर लिखा है कि विधानसभा का सत्र 21 दिन के अंतर से बुलाया जाए। जो पहले 14 दिन हुआ करता था। इसे विधायकों की सुविधा के लिए बदल दिया गया था।
मेघवाल ने विधानसभा की बैठक 15 जनवरी को बुलाने पर आपत्ति कर प्रतिपक्ष के नेता की भूमिका शुरू कर दी है। इस बीच मेघवाल ने गुरुवार को वसुंधरा राजे से मुलाकात की है। माना जा रहा है कि राजे को पार्टी केंद्र में भेजने और प्रतिपक्ष का नेता किसी और को बनाना चाहती है। राजे प्रतिपक्ष की नेता नहीं बनाई गई तो मेघवाल उनकी पहली पसंद हैं।
मेघवाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और बीते चुनाव में भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा सीट से जीते हैं। नौवीं बार विधायक चुने जाने वाले मेघवाल 2013 से विधानसभा अध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।