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Rajasthan Panchayat Elections: पंचायत-निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट में सुनवाई टली, 26 मई को अगली सुनवाई

Mon, 18 May 2026 03:37 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई 26 मई तक टाल दी। सरकार और आयोग द्वारा चुनाव टालने संबंधी प्रार्थना पत्र पर फैसला पहले से सुरक्षित रखा गया है।

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राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव में हो रही देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई तय की है।

दरअसल, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, गिर्राज सिंह देवंदा और अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित थी। हालांकि, सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से चुनाव टालने संबंधी प्रार्थना पत्र पर फैसला पहले से सुरक्षित होने के कारण अदालत ने सुनवाई आगे बढ़ा दी।

इससे पहले पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किए थे। अदालत ने आयोग से सवाल किया था कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय समय सीमा से आगे कैसे जारी किया गया।

याचिकाकर्ता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अदालत में कहा था कि प्रदेश में पिछले डेढ़ साल से संवैधानिक संकट की स्थिति बनी हुई है और आमजन प्रशासकों की मनमानी से परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर चुनाव टाल रहे हैं, जो हाईकोर्ट के आदेश की सीधी अवमानना है।

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लोढ़ा ने यह भी कहा था कि चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव के लिए 22 अप्रैल तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया था। ऐसे में यह स्पष्ट था कि हाईकोर्ट द्वारा तय 15 अप्रैल की समय सीमा में चुनाव कराना संभव नहीं होगा।

इधर, पंचायत और निकाय चुनाव टालने को लेकर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर 11 मई को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।

सरकार ने अपने प्रार्थना पत्र में विभिन्न प्रशासनिक और आरक्षण संबंधी परिस्थितियों का हवाला देते हुए दिसंबर तक चुनाव टालने की मांग की है। वहीं राज्य चुनाव आयोग ने भी सरकार के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा है कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।

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