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लोकनृत्य गवरी: हिस्सा लेने वाले 40 दिन नहीं करते स्नान, खाते हैं एक वक्त का खाना

Thu, 19 Sep 2019 10:06 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

  • 150 कलाकार मिलकर गवरी करते हैं
  • 40 दिनों तक सदस्यों को नहाना नहीं होता है
  • पूरे कार्यक्रम तक एक समय का भोजन करते हैं
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गवरी नृत्य करते सदस्य - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अगर आपको एक दिन न नहाने के लिए कहा जाए तो आपस असहज हो जाएंगे, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में एक समाज ऐसा भी है जो पूजा अर्चना के लिए 40 दिनों तक नहीं नहाता है। साथ ही माता की पूजा तक सदस्य लोगों को 40 दिनों तक एक समय का भोजन ही करना होता है। 

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यह पूजा राजस्थान के भीलवाड़ा में की जाती है। यहां मंगलवार को भील समाज के लोगों ने गौरज्या माता की स्थापना के लिए गवरी लोकनृत्य किया। स्थानीय लोग बताते हैं कि गवरी में हिस्सा लेने वाले कलाकारों के एक समूह 150 सदस्य होते हैं। इसमें भाग लेने वाले लोगों को बेहद कड़े नियमों का पालन करना होता है। 

जो गवरी करते हैं, उन लोगों को 40 दिनों तक बिना नहाए रहना होता है। उन्हें हरी सब्जियां और मांस मदिरा का त्याग करना होता है और दिन में केवल एक बार खाना होता है। साथ ही वे नंगे पांव रहते हैं। सवा महीने तक सभी सदस्य अपने घर न जाकर मंदिर में ही रहते हैं और जमीन पर सोते हैं। 
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साथ ही गवरी करने वाले कलाकारों को कठिन ब्रह्मचर्य का पालन भी करना पड़ता है। खास बात यह है कि इसमें अभिनय करने वाले सभी सदस्य पुरुष ही होते हैं। इनमें से कुछ लोगों को महिला का किरदार निभाना होता है। 40 दिनों के बाद माता को शाही सवारी के साथ जल में विसर्जित कर दिया जाता है। 

मान्यता है कि गौरज्या माता की पूजा से लड़ाई-झगड़े और दुखों से छुटकारा मिलता है। गवरी के आयोजक वजेराम गमेती ने बताया कि गौरज्या माता पार्वती की बहन हैं। ठंडी राखी के दिन गौरज्या माता कैलाश पर्वत पर उनसे मिलने आती है। 

बहन को सबसे मिलाने के लिए मेवाड़ में जगह-जगह गवरी खेल का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन 40 दिन तक चलता है। मान्यता है कि गौरज्या माता श्रद्धालुओं के संकट दूर करती हैं। साथ ही लड़ाई-झगड़े और दुखों से छुटकारा दिलाती हैं।

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