राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्राध्यापक-हिंदी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री के जरिये नौकरी पाने के मामले में एसओजी ने एक और वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी अभ्यर्थी को मेवाड़ विश्वविद्यालय के नाम से तैयार एमए हिंदी की फर्जी अंकतालिका और डिग्री उपलब्ध कराने में शामिल था। इस पूरे फर्जीवाड़ा प्रकरण में एसओजी अब तक कुल 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
एसओजी की टीम ने लगातार तलाश के बाद वांछित आरोपी दीनदयाल मोलपुरिया (46) को गिरफ्तार किया है। आरोपी चूरू जिले के सरदारशहर स्थित रेगर बस्ती का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। एसओजी की टीम आरोपी से फर्जी डिग्री तैयार कराने वाले नेटवर्क और उसके अन्य सहयोगियों के विषय में पूछताछ कर रही है।
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पात्रता जांच में उजागर हुआ मामला
आयोग की प्राध्यापक-हिंदी प्रतियोगी परीक्षा-2022 के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेज की पात्रता जांच की जा रही थी। इस दौरान अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी पुत्री बाबूलाल विश्नोई ने मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार, चित्तौड़गढ़ के नाम से बनी एमए हिंदी की डिग्री आयोग के समक्ष प्रस्तुत की थी। आयोग ने जब इस डिग्री का सत्यापन कराया तो विश्वविद्यालय ने इसे जारी करने से साफ मना कर दिया। असत्य दस्तावेज और फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाने के इस प्रयास पर अजमेर के सिविल लाइंस पुलिस थाने में 20 मार्च 2024 को मामला दर्ज किया गया था।
16 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
जांच के दौरान मामले में आरोपी दीनदयाल की मुख्य भूमिका सामने आई। जांच में पता चला कि आरोपी दीनदयाल ने कौशल किशोर चंदन के माध्यम से मेवाड़ विश्वविद्यालय से संपर्क साधा था। इसके बाद उसने अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी के लिए एमए हिंदी की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनवाई। फर्जी दस्तावेज तैयार होने के बाद बाबूलाल पटेल के माध्यम से इसे अभ्यर्थी तक पहुंचाया गया था। एसओजी ने साक्ष्य प्रमाणित पाए जाने पर आरोपी की तलाश तेज की थी। इस मामले में फर्जी डिग्री प्राप्त करने वाली अभ्यर्थी ब्रह्मा कुमारी समेत कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।