हर पांच साल के बाद सरकार बदलने के चलन के आदी हो चुके राजस्थान में युवा छात्र मतदाता भी एक बार तो पूछने पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ भड़ास निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ता। मगर शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के कुछ हाल में उठाए कदम और वायदों को लेकर बात की जाए तो सुर कुछ बदलने लगते है।
फिर भी जमीनी विकास और चार साल में कुछ नहीं। आखिरी साल में ही चुनावी फायदे के लिए मुफ्त लैपटॉप, छात्रवृत्ति और छात्रों को साइकिल व स्कूटी बांटने जैसी योजनाओं को झुनझुना मानने वाले छात्रों की कमी भी नहीं।
वहीं वसुंधरा राजे का पिछला काम और नरेंद्र मोदी का असर भी आईआईटी कोटा और वहां के बड़े शिक्षण संस्थानों के छात्रों की बातों में देखने को मिलता है।
कोटा के रानपुर में बने ढेरों तकनीकी शिक्षण संस्थानों और ट्रिपल आईटी तक पहुंचने वाली सड़कें खराब हैं। स्थानीय छात्र कुछ इससे नाराज है। वहीं कॉलेजों के शिक्षकों और प्रबंधन पदाधिकारियों की राय नकारात्मक बातों से शुरू होती है।
आर एन मोदी इंजीनियरिंग कॉलेज की तकनीकी शिक्षक डॉ शोभा कहती है कि लैपटॉप बांटने से ही आईटी शिक्षा को लागू करने का काम पूरा नहीं होता। ढांचागत सुविधा भी बेहतर करने की जरूरत है।