राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए भाजपा के घोषणापत्र में 'गोरखधंधा शब्द का इस्तेमाल पर प्रतिंबध लगाने का वादा शामिल है, जिसमें कहा गया है कि गोरखधंधा शब्द गोरखनाथ पीठ की छवि को नुकसान पहुंचाता है। भाजपा पार्टी के वरिष्ठ नेता ओंकार सिंह लखावत बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों है।
राजस्थान में गोरखनाथ कितना प्रासंगिक है?
इस मुद्दे पर बात करते हुए ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि राजस्थान में गोरखनाथ कितने प्रासंगिक है इसका अनुमान हम इस बात से लगा सकते है कि राजस्थान में शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां इनकी पूजा न होती हो। यहां जन्माष्टमी के दूसरे दिन पूरे प्रदेश गोगा नवमी का उत्सव मनाया जाता है, जहां 65 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हनुमानगढ़ में गोगामेदी गांव के गोगामेदी मंदिर में आते हैं।
गोरखधंधा शब्द पर आपत्ति क्यों?
गोरखधंधा शब्द के उपयोग पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा गोरखनाथ हम सभी के लिए बलिदान का प्रतीक हैं। वह एक तपस्वी थे जिन्होंने समाज की भलाई के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। उनका नाम हम आज इस तरह अवैध गतिविधि में संलग्न लोगों के धंधे के उपर नही कर सकते हैं।
ये मुद्दा किसने उठाया?
जब हमने इस बात का ऐलान अपने घोषणापत्र में किया तो धुमंतू जनजातियों के बहुत से लोगों ने हमारा धन्यवाद किया।
ये मांग अब क्यों उठी?
उन्होंने अपने बयान में कहा कि जब जागो तभी सवेरा। यह पहली सरकार है जो इस तरह के कदम उठा रही है। भाजपा ने गोगामेदी मंदिर पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और यह सुनिश्चित करेंगे कि राजस्थान राज्य बोर्ड की किताबों में गोरखनाथ को पढ़ाया जाए। हमने गुरु गोरखनाथ पर राष्ट्रीय स्मारक की भी योजना बनाई है।
यह प्रावधान लागू कैसे होगा?
कुछ कानूनी प्रावधान हैं, हम उन प्रावधानों को देखेंगे। शब्द का उपयोग एक दंडनीय अपराध होगा।