दौसा में कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। लेकिन जैसे ही महवा विधानसभा से कांग्रेस का टिकट निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश हुडला को मिला तो स्थानीय कांग्रेसी लगातार विरोध में एकजुट हो गए। जहां महवा के कांग्रेसियों ने विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस की ओर से ओमप्रकाश हुडला को प्रत्याशी घोषित किया गया है। वैसे ही पुराने कांग्रेसी जो महवा विधानसभा से टिकट की दावेदारी कर रहे थे, वो निराश हो गए।
वरिष्ठ कांग्रेसी रामनिवास गोयल ने कहा, हुडला को कांग्रेस का टिकट मिला है। इसलिए स्थानीय कांग्रेसी गैर विचारधारा के आदमी को टिकट देने का विरोध कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि हुडला आरएसएस पृष्ठभूमि का आदमी है, जिसकी विचारधारा कांग्रेस से मिलती ही नहीं है। ऐसे आदमी को टिकट देने के बाद स्थानीय कांग्रेस प्रत्याशी के साथ नहीं लगेंगे, उन्होंने अपनी ही पार्टी से प्रत्याशी बदलने की मांग की है।
इधर, अजीत सिंह का कहना है कि ये पार्टी के हित में भी नहीं होगा। वर्तमान कांग्रेस उम्मीदवार का विरोध है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में महवा विधानसभा से 27 उम्मीदवार टिकट मांगे हैं, किसी भी एक उम्मीदवार को टिकट देने पर स्थानीय कांग्रेसी उसके साथ लगेंगे और उसी उम्मीदवार को चुनाव जीतने की बात भी करेंगे। अपनी ही पार्टी के टिकट के विरोध में मंडावर रोड से हिंडौन रोड तक सड़कों पर नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन किया गया। हुडला का विरोध कर रहे लोगों को कहना है कि गैर कांग्रेसी को टिकट दिया जाना कांग्रेस के लिए सही साबित नहीं होगा। पार्टी को टिकट बदलना चाहिए और अगर टिकट नहीं बदलता है तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
साल 2013 के चुनाव में ओमप्रकाश हुडला भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव लड़े थे और जीते थे। इसके बाद 2018 के चुनाव में जब उन्हें भारतीय जनता पार्टी की ओर से टिकट नहीं दिया गया तो उन्होंने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था और चुनाव जीता था। इस बार वे कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए गए हैं, उनके नाम की घोषणा के साथ से ही लगातार विरोध हो रहा है।
उधर, अपने टिकट को लेकर विधायक ओमप्रकाश हुडला कांग्रेस कार्यालय का उद्घाटन कर चुके हैं और अपने समर्थकों के साथ प्रचार में जुट गए हैं। विरोध कर रहे कांग्रेसियों ने महवा के कांग्रेस के टिकट का विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि या तो कुछ दिनों में पार्टी टिकट रिप्लेस कर दे, नहीं तो मजबूरन स्थानीय कांग्रेसियों को कोई बड़ा निर्णय लेना पड़ेगा, जिसके चलते स्थानीय कांग्रेसी किसी एक को चुनाव लड़वा सकते हैं।