पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बदले समीकरण
2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 11 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 13 सीट आई थी। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 5, बहुजन समाज पार्टी ने 2 और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी ने 1 सीट पर जीत दर्ज की थी।
2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्र में 28 सीटें जीतीं थी। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। 2018 में चुनाव में कांग्रेस ने यहां जोरदार वापसी करते हुए 20 सीटों पर कब्जा किया, जबकि भाजपा और स्वतंत्र उम्मीदवारों को 6-6 सीट पर जीत मिली थी।
हाड़ौती ने दिए दो सीएम, ये माना जाता है पार्टी का किला
हाड़ौती को भाजपा का सबसे मजबूत किला माना जाता है। ये पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल का इलाका है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी इसी हड़ौती इलाके से आते हैं। हाड़ौती ने राजस्थान को दो मुख्यमंत्री भी दिए है। पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत और वसुंधरा राजे। वसुंधरा राजे झालावाड़ की झालरापाटन सीट से विधायक और उनके पुत्र दुष्यंत सिंह झालावाड़ सीट से सांसद हैं। भाजपा के पूर्व सीएम भैरोसिंह शेखावत भी बारां से चुनाव लड़ चुके हैं।
हाड़ौती की बात करें तो इसमें चार जिले कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ आते हैं। इन जिलों में विधानसभा की 17 सीटें हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां की 10 और कांग्रेस ने सात सीटों पर कब्जा जमाया था। इससे पहले 2013 के चुनाव में भाजपा ने 16 सीटों पर अपना परचम लहराया था। कांग्रेस को केवल एक सीट से ही संतोष करना पड़ा था।