सरदारपुरा और टोंक सीट पर इनमें होगा मुकाबला।
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राजस्थान के सत्ता संग्राम में भाजपा ने अपने 182 सियासी खिलाड़ी उतार दिए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने भाजपा ने सरदारपुरा विधानसभा सीट से महेंद्र सिंह राठौड़ को टिकट दिया है। राठौड़ जोधपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के सामने पार्टी ने अजीत सिंह मेहता को टिकट दिया है। मेहता टोंक सीट से एक बार विधायक रह चुके हैं।
सीएम गहलोत के सामने इन नामों पर भी हो रही थी चर्चा
इससे पहले चर्चा थी कि सीएम गहलोत के सामने भाजपा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को चुनाव लड़ा सकती है। इसके अलावा रविद्र सिंह भाटी, राजेंद्र गहलोत, नरेंद्र सिंह कच्छावा और ममता परिहार के नाम भी दावेदारों में शामिल थे। लेकिन, आखिर में भाजपा ने महेंद्र सिंह राठौड़ को टिकट दे दिया है।
पायलट से मुकाबला करने वाले मेहता कौन?
भाजपा ने टोंक सीट से सचिन पायलट के खिलाफ अजीत सिंह मेहता को टिकट दिया है। मेहता 2013 में चुनाव जीतकर इस सीट विधायक बने थे। उस दौरान उन्होंने 30 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। हालांकि, उस समय उनका मुकाबला पायलट से नहीं हुआ था। उस दौरान पायलट सांसद थे। इससे पहले मेहता भाजपा में मंडल अध्यक्ष और जिला उपाध्यक्ष जैसे पदों पर भी रह चुके हैं।
कद्दावर नेता के सामने क्यों बड़ा नेता नहीं उतारती हैं पार्टियां?
सीएम गहलोत के सामने भाजपा ने सरदारपुरा सीट पर जेड़ीए के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह राठौड़ को उतारा है। भाटी और शेखावत समेत कई दावेदारों को टिकट नहीं दिया गया। गहलोत प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं साथ प्रदेश की राजनीति में उनका कद काफी बड़ा है। जबकि राठौड़ अपना पहला चुनाव लड़ने जा रहे हैं, ऐसे में गहलोत का गढ़ रही सरदारपुरा सीट पर उनका जीतना काफी मुश्किल माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकार भी गहलोत के सामने राठौड़ को कमजोर प्रत्याशी बता रहे हैं। भाजपा के इस फैसले को लेकर उनका कहना है कि राजनीतिक पार्टियां अक्सर ऐसा ही करती हैं। विपक्षी पार्टी के बड़े नेता के सामने बड़ा नेता नहीं खड़ा करती हैं। क्योंकि, बड़े नेता के हारने से पार्टी की छवि खराब होती है, साथ जिस सीट पर वह जीत सकता है, उसे वहां से हटाने पर उस सीट पर भी हार का खतरा हो जाता है। ऐसे पार्टियां बड़े नेताओं के सामने अक्सर ऐसे ही चेहरे उतारतीं हैं जिनके हारने का प्रभाव पार्टी पर ना पड़े और अगर, कहीं वह जीतकर आ जाए तो भी बल्ले-बल्ले तय है।