इसका जवाब देते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि 300 से ज्यादा लोगों के नंबर 75 से 80 फीसदी के बीच है। उन्होंने कहा, 'मेरी पुत्रवधू प्रतिभा से तो रिश्ता ही परीक्षा के बाद जुड़ा था।'
मंत्री बोले- बच्चे टैलेंटेड हैं, तो इसमें मेरा क्या दोष
उन्होंने कहा कि बहू प्रतिभा के भाई गौरव का तो दिल्ली पुलिस में भी एएसआई के पद पर चयन हो चुका है। यदि बच्चे टैलेंटेड हैं, तो फिर इसमें मेरा क्या दोष है? डोटासरा ने कहा कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) प्रतिभा आधारित परीक्षा है। इसमें कोई घालमेल नहीं है। अंक मुद्दा नहीं होना चाहिए। यह सोशल मीडिया का प्रचार है, पारिवारिक संबंधों के कारण किसी को अंक नहीं मिलते हैं।
बता दें कि अभी हाल ही में एसीबी की ओर से आरपीएससी व आरएएस परीक्षा 2018 में घूसखाेरी का खुलासा किया गया है। पकड़े गए आराेपी कनिष्ठ लेखाकार सज्जन सिंह और आरपीएसपी मेंबर राजकुमारी गुर्जर के भाई के टाेल नाके के सुपरवाइजर नरेंद्र पाेसवाल के बारे में तफ्तीश में यह सामने आया है कि वे अभ्यर्थियाें काे इंटरव्यू में अच्छे नंबर दिलाने और सफल कराने के बदले में 25 लाख रुपये घूस की डिमांड करते थे।
सोशल मीडिया का प्रोपगेंडा: डोटासरा
विवाद होने पर बुधवार को डोटासरा ने इसे सोशल मीडिया का प्रोपगेंडा करार दिया और कहा कि आरएएस परीक्षा बहुत ही पारदर्शी तरीके से होती है और काबिल बच्चे ही इसमें सफल होते हैं। डोटासरा को इस मामले में विशेष रूप से विपक्ष के कटाक्ष का सामना करना पड़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि मुख्यमंत्री को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।