रियल एस्टेट व्यापारी रविंद्र बातते हैं कि नवाब को तलाशने के लिए उनहोंने पुलिस का भी सहयोग लिया। अभय कमांड रूम में कृष्णा नगर, बासनी, झालामंड, सहित कई जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। शोरूम, दुकानों और होटलों में लगे सीसीटीवी भी देखे, लेकिन उसका पता नहीं चल सका है। उसे तलाशने के लिए अखबरों में विज्ञापन भी दिए और पांच हजार रुपये के इनाम की घोषणा की। दिन-रात नवाब को ढूंढने के बाद भी उसका पता नहीं चल रहा है।
रविंद्र का कहना है कि नावाब को ढूंढने के लिए सात लोगों को लगाया है। उन्हें रोजाना 700-700 रुपये दे रहा हूं। आस-पास की दुकानों में पम्पलेट छपवाकर भी लगाए गए हैं। घर के सदस्य भी उसकी तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन अब तक सिर्फ मायूसी हाथ लगी है।
देवव्रत नवाब के जाने से उदास है।
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घर में ऐसे रहता था नवाब
छह दिन से लापता नवाब लग्जरी लाइफ जीता था। वह समझदार इतना था कि बाहर से आने पर पैर धुलकर ही अंदर आता था। उसके लिए घर में एक अलग से कमरा है। जिसमें एसी भी लगा हुआ है। 16-17 घंटे वह एसी में ही रहता था, अगर एसी बंद कर दिया जाए तो शोर मचाता था। खाने में उसे रोटी, सब्जी और मांस दिया जाता था।
भाई और बहन को बहुत प्यारा था नवाब
रविंद्र के दो बच्चे हैं, एक बेटी निहारिका और बेटा देवव्रत। दोनों को ही नवाब से बहुत लगाव था। उसका ज्यादातर समय दोनों के साथ ही बीतता था, लेकिन जब से नवाब लापता हुआ है, तब से दोनों बच्चे उदास है। जब भी रविंद्र बाहर से लौटते हैं, उनका एक ही सवाल होता है नवाब मिला क्या? वह बच्चों को उसके जल्द मिल जाने की बात कहकर दिलासा दे रहे हैं।