Rajasthan News: मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़े एक और नेटवर्क का राजस्थान की पुलिस ने खुलासा किया है। प्रताड़ना झेल रही 15 साल की किशोरी को इस यातना से आजाद करा दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर
महज 50 हजार रुपये के कर्ज के कारण एक 15 वर्षीय किशोरी के यौन शोषण और मानव तस्करी का मामला सामने आया है। पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त कार्रवाई में किशोरी को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। मामले ने एक बार फिर बूंदी जिले के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़े संदिग्ध नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार पर चढ़े कर्ज का फायदा उठाकर किशोरी को कथित तौर पर दलालों के हवाले कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद करीब दो वर्षों तक उसका लगातार शोषण किया गया। साहस जुटाकर पीड़िता ने पुलिस तक अपनी बात पहुंचाई, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित निकाला गया। मामले में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
कहां से उठा मामला?
क्या बोलीं बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष?
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि आर्थिक तंगी और कर्ज का फायदा उठाकर दलाल गरीब परिवारों को निशाना बनाते हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में नाबालिग लड़कियों की कथित खरीद-फरोख्त की आशंका भी सामने आई है। हालांकि इन तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। संबंधित थाना प्रभारी प्रिया व्यास ने कहा कि मानव तस्करी और दलालों के नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
क्या बोले सामाजिक कार्यकर्ता?
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले के कुछ क्षेत्रों में लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक पिछड़ेपन का फायदा उठाकर बाहरी दलाल सक्रिय रहने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रशासन, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय के प्रयासों से स्थिति में सुधार आया है तथा बड़ी संख्या में परिवार इस कथित परंपरा से बाहर निकलकर शिक्षा, खेती, मजदूरी और अन्य सम्मानजनक रोजगार की ओर बढ़े हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार और जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, रोजगार उपलब्ध कराने तथा मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से ही ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाई जा सकती है।
क्या बोले एसपी सिटी?