तथ्यों को छिपाया जा रहा है इससे युवाओं में रोष
विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने कहा- आरोप-प्रत्यारोप लगाने से काम नहीं चलेगा। बल्कि सरकार को यह बताना चाहिए कि पेपर लीक के मामले में किन-किन लोगों को पकड़ा गया है और क्या कार्रवाई की गई है? लेकिन तथ्यों को छिपाया जा रहा है, जिस कारण बेरोजगार युवाओं में आक्रोश है। उन्होंने कहा-सरकार को विधानसभा के कमेटी बनाकर परीक्षाओं में सुधार के लिए काम करने की जरूरत है। सेकंड ग्रेड पेपर लीक के मामले में एक गरीब बच्चा जो 5 लाख रुपए नहीं दे सकता था, उसने उदयपुर एसपी को इस मामले की जानकारी दी थी । उदयपुर एसपी ने निश्चित तौर पर समय रहते कार्रवाई कर मामले को उजागर किया। सरकार चाहे किसी की भी हो, लेकिन पेपर लीक मामला बहुत गंभीर है।इसे गंभीर समस्या मानकर समाधान ढूंढना चाहिए।
सुरेश ढ़ाका- भूपेंद्र सारण में 10-10 लाख में पेपर बेचे
विपक्ष के उप नेता राजेंद्र राठौड़ ने कहा- शिक्षक पेपर लीक मामले में सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण सहित आरोपियों ने 10-10 लाख में रुपए में पेपर बेचे हैं। रीट पेपर लीक केस में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोलिया और कॉर्डिनेटर प्रदीप पाराशर को क्यों नहीं पकड़ा ? सवाल है। उन्होंने कहा पूरे मामले को दबाया जा रहा है। राठौड़ ने आरोप लगाया कि विप्र बोर्ड की उपाध्यक्ष मंजू शर्मा के बेटे धीरज शर्मा को पेपर लीक के मामले में पकड़ा गया था। लेकिन उसकी स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कन्स्टेबल पेपर लीक के मामले में आरोपी उदाराम की संपत्ति आज तक जब्त नहीं कि गई। बीजेपी विधायक कालीचरण सराफ, मदन दिलावर ,अनिता भदेल और बलराम पूनिया ने भी सरकार से पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
प्राइवेट इंस्टिट्यूट्स में परीक्षा नहीं करवाई जाए
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के विधायक नारायण बेनीवाल ने इस दौरान कहा- प्रतियोगी परीक्षाएं प्राइवेट संस्थाओं में कराने की व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत है। जांच भले ही एसओजी करें, उसमें किसी का कोई लेना देना नहीं है। लेकिन जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। अगर भाजपा सीबीआई से जांच कराना चाहती है, तो राज्यपाल को वह पत्र क्यों नहीं दे रही। अगर न्याय नहीं मिला, तब हम कोर्ट में जाकर इसकी जांच सीबीआई से कराने का निवेदन करेंगे। निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा बोले- केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों में भी कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। आरपीएससी और अधिनस्थ बोर्ड में योग्य व्यक्तियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए, जिससे की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा सके।