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राजस्थान चुनाव: इतिहास बदलेगी भाजपा या कांग्रेस बनाए रखेगी दस्तूर?

Thu, 06 Dec 2018 05:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जयपुर
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EVM
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राजस्थान में शुक्रवार को मतदान होगा और राजनीतिक पार्टियों और प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतपेटियों में बंद हो जाएगा। प्रदेश में ढाई दशक से हर पांच साल में सरकार बदलने का इतिहास तोड़ते हुए भाजपा सत्ता में रहेगी या कांग्रेस इस दस्तूर को बरकार रखते हुए सत्ता हासिल करेगी, इसका फैसला राजस्थान सहित पांचों राज्यों की मतगणना के दिन 11 दिसंबर को हो जाएगा।
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इस चुनाव में भाजपा द्वारा घोषित सीएम चेहरे मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मंत्री राजेंद्र राठौड़, अरुण चतुर्वेदी, राजपाल सिंह शेखावत, वासुदेव देवनानी, एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी यूनुस खान जैसे प्रत्याशियों की और कांग्रेस में सीएम पद के दावेदार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.पी. जोशी, डॉ. गिरिजा व्यास, विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे विधायक मानवेंद्र सिंह सहित कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस विधानसभा चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की पार्टियां पूरी ताकत झोंककर लोकसभा के परिणाम को अपने पक्ष में करना चाहती हैं। राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं, लेकिन अलवर की रामगढ़ सीट से बसपा उम्मीदवार की मृत्यु होने से इस सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है। राजस्थान में शुक्रवार को 199 सीटों पर मतदान होगा। कांग्रेस ने इस चुनाव में किसी को भी सीएम चेहरा नहीं घोषित किया है। वसुंधरा राजे तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रचना चाहती हैं, तो कांग्रेस में अशोक गहलोत भी अगर मुख्यमंत्री बने तो इतिहास बना सकते हैं।
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यूपीए के समय दो बार सांसद रहे और केंद्रीय मंत्री रहे सचिन पायलट अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह भी कांग्रेस से सीएम पद के दावेदार हैं। कांग्रेस की जीत हुई तो साल 1998 के बाद राजे और गहलोत के अलावा राजस्थान को पायलट के रूप में सीएम का नया चेहरा मिल सकता है।
 
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दोनों दलों की चुनौतियां और प्रयास

सत्तारूढ़ भाजपा सत्ता विरोधी रुझान से जूझ रही है, तो विपक्ष में बैठी कांग्रेस गुटबाजी से। हालांकि पिछले दस दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ, चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर, नितिन गड़करी, स्मृति ईरानी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित प्रमुख नेताओं के द्वारा टी-20 जैसा ताबड़तोड़ प्रचार ने भाजपा को खुद स्थिति में सुधार की उम्मीद जरूर जगा दी है। इधर, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, अशोक गहलोत व सचिन पायलट, पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आदि ने भी प्रचार में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।

कल्याण सिंह नहीं कर पाएंगे मताधिकार का प्रयोग

राजस्थान के प्रथम नागरिक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राज्यपाल कल्याण सिंह लोकतंत्र केे कुंभ में मतदान नहीं कर पाएंगे। उन्होंने अपना नाम यहां की वोटर लिस्ट में नहीं जुड़वाया है। कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, इसके कारण उनका नाम वहां की वोटर लिस्ट में है। राजस्थान में मताधिकार का प्रयोग केवल एक राज्यपाल एस.के. सिंह ने किया था। उन्होंने राज्यपाल बनने के बाद दिल्ली की वोटर लिस्ट से अपना नाम कटवा कर यहां की वोटर लिस्ट में जुड़वा लिया था। इधर, पंजाब के राज्यपाल वी.पी. सिंह बदनौर राजस्थान में वोट डाल सकेंगे। बदनौर राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को पूरी तरह जांच परखकर और मॉक पोल करवाकर कड़ी सुरक्षा में केंद्रों पर रखवा दिया गया है। मतदान के लिए प्रदेशभर में 2 लाख से ज्यादा ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
 
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