राजनीति में सत्ता हासिल करने के लिए अक्सर सारे जोड़-तोड़, सारे घोड़े, सारे दांव एक साथ इस्तेमाल करने होते हैं। इसके लिए फिर चाहे भाई को भाई से या जाति को जाति से लड़ाना पड़े। सत्ता के लिए सब जायज है। इसी बात पर अमल करते हुए, भाजपा और कांग्रेस ने राजस्थान के चुनावी मैदान को फतह करने के लिए 60 सीटों पर एक ही जाति के उम्मीदवारों को आमने-सामने चुनावी रण में उतारा है। जातियों में अंदरूनी संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।
इस बार राजस्थान के चुनाव में ऐसा लगता है कि दूसरी जातियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इस बार राजस्थान में मीणा के सामने मीणा, मेघवाल के सामने मेघवाल, जाट के सामने जाट और ब्राह्मण के सामने ब्राह्मण उतारा गया है। बता दें कि यह मुकाबला दिलचस्प होने के साथ पूरा चुनाव ही जाति आधारित हो गया है।
मेघवाल का मुकाबला मेघवाल से: 6 सीटें
1. खाजूवाला
2. सुजानगढ़
3. धोद
4. जायल
5. भोपालगढ़
6.चौहटन
ब्राह्मण के सामने ब्राह्मण उम्मीदवार: 6 सीटें
1. कोटा दक्षिण
2. बूंदी
3. बीकानेर पश्चिम
4. हवामहल
5. सीकर
6. रतनगढ़
भील का सामना भील प्रत्याशी से : 9 सीटें
1.झाड़ौल
2. खैरवाड़ा
3. डूंगरपुर
4. सागवाड़ा
5. चौरासी
6. घाटोल
7.गढ़ी
8. बांसवाड़ा
9. बागीडोरा
15 सीटों पर जाट के सामने जाट प्रत्याशी
1. सूरतगढ़
2. हनुमानगढ़
3. भादरा
4. लूणकरणसर
5. सादुलपुर
6. मंडावा
7. खंडेला
8. डीग-कुम्हेर
9. डेगाना
10 नावां
11. ओसियान
12. बायतू
13. झुंझनू
14. किशनगढ़
15. मालपुरा में कांग्रेस ने आरएलडी से गठबंधन किया है। यहां आरएलडी और भाजपा ने जाट समाज के प्रत्याशी घोषित किए।