सीएम वसुंधरा राजे का सामना युवा सचिन पायलट और अनुभवी अशोक गहलोत से है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। 2013 में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा इस बार सत्ता विरोधी रुझान का मुकाबला कर रही है। इस मुकाबले में कौन बाजी मारेगा, इसका अंदाजा लगाना इस बार ज्यादा मुश्किल नहीं नजर आ रहा है। तमाम सर्वे कांग्रेस की सरकार बनने का अनुमान जता रहे हैं। यहां का सियासी इतिहास भी इसकी तस्दीक करता है।
भाजपा को मिला था प्रचंड बहुमत
यहां 7 दिसबंर को मतदान होना है। और इसी दिन जनता वसुंधारा राजे का भाग्य ईवीएम में कैद कर देगी। हमेशा की तरह इस बार भी मुकाबाल कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2013 में भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह हराकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। इसका काफी श्रेय वसुंधरा राजे को गया था। भाजपा ने 45 फीसदी वोटों के साथ 200 में से 163 सीटें जीतकर जीत का नया इतिहास रचा था। अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस को महज 21 सीटें ही मिली थीं।
लेकिन इस बार वसुंधरा राजे और भाजपा की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है। इसका संकेत उपचुनावों नतीजों में ही मिल गया था जब भाजपा ने 3 बड़ी सीटें गंवाई थीं। राजस्थान को लेकर हुए कई ओपिनियन पोल में कहा गया है कि यहां कांग्रेस की वापसी तय है और भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। राजस्थान का सियासी इतिहास भी बताता है कि यहां की जनता ने पिछले 25 सालों में किसी भी पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं कराई है।
खास बात ये है कि इस बार राजस्थान में जनता वसुंधरा राजे से नाराज नजर आ रही है। लेकिन मोदी सरकार से जनता को ज्यादा शिकायतें नहीं हैं। यही एक फैक्टर भाजपा की दशा व दिशा तय कर सकता है। यहां की फिजाओं में एक नारा गूंज रहा है- मोदी तुझसे बैर नहीं, पर रानी तेरी खैर नहीं। ये नारा बताता है कि लोग मोदी सरकार से तो नाराज नहीं हैं, लेकिन लोगों में वसुंधरा राजे और उनकी सरकार को लेकर खासी नाराजगी है।