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कमजोर पिच पर बैटिंग कर रहीं वसुंधरा को सचिन पायलट कर पाएंगे क्लीन बोल्ड? 

Fri, 30 Nov 2018 07:33 AM IST
अमित कुमार मंडल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वसुंधरा राजे - सचिन पायलट का मुकाबला
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सीएम वसुंधरा राजे का सामना युवा सचिन पायलट और अनुभवी अशोक गहलोत से है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। 2013 में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा इस बार सत्ता विरोधी रुझान का मुकाबला कर रही है। इस मुकाबले में कौन बाजी मारेगा, इसका अंदाजा लगाना इस बार ज्यादा मुश्किल नहीं नजर आ रहा है। तमाम सर्वे कांग्रेस की सरकार बनने का अनुमान जता रहे हैं। यहां का सियासी इतिहास भी इसकी तस्दीक करता है। 

भाजपा को मिला था प्रचंड बहुमत 

यहां 7 दिसबंर को मतदान होना है। और इसी दिन जनता वसुंधारा राजे का भाग्य ईवीएम में कैद कर देगी। हमेशा की तरह इस बार भी मुकाबाल कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2013 में भाजपा ने कांग्रेस को बुरी तरह हराकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। इसका काफी श्रेय वसुंधरा राजे को गया था। भाजपा ने 45 फीसदी वोटों के साथ 200 में से 163 सीटें जीतकर जीत का नया इतिहास रचा था। अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस को महज 21 सीटें ही मिली थीं। 
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लेकिन इस बार वसुंधरा राजे और भाजपा की राह बेहद मुश्किल नजर आ रही है। इसका संकेत उपचुनावों नतीजों में ही मिल गया था जब भाजपा ने 3 बड़ी सीटें गंवाई थीं। राजस्थान को लेकर हुए कई ओपिनियन पोल में कहा गया है कि यहां कांग्रेस की वापसी तय है और भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। राजस्थान का सियासी इतिहास भी बताता है कि यहां की जनता ने पिछले 25 सालों में किसी भी पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं कराई है।  

खास बात ये है कि इस बार राजस्थान में जनता वसुंधरा राजे से नाराज नजर आ रही है। लेकिन मोदी सरकार से जनता को ज्यादा शिकायतें नहीं हैं। यही एक फैक्टर भाजपा की दशा व दिशा तय कर सकता है। यहां की फिजाओं में एक नारा गूंज रहा है- मोदी तुझसे बैर नहीं,  पर रानी तेरी खैर नहीं। ये नारा बताता है कि लोग मोदी सरकार से तो नाराज नहीं हैं, लेकिन लोगों में वसुंधरा राजे और उनकी सरकार को लेकर खासी नाराजगी है। 
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वसुंधरा राजे से नाराज दिख रही जनता

वसुंधरा राजे का व्यक्तित्व जरूर करिश्माई है लेकिन आम जनता पर इसका असर नजर नहीं आया है। कई तबकों में उन्हें लेकर नाराजगी है। उनपर पार्टी को भी कमजोर करने का आरोप लगता है। भाजपा हाईकमान भी उनपर एक सीमा से ज्यादा दबाव नहीं बना पाया। पार्टी लगातार यहां कमजोर पड़ रही है। 

इस बार युवा यहां बड़ी संख्या में मतदान करेगा जिसमें पहली बार वोट डालने वाले युवा भी शामिल हैं। इनका सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार है। इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट वसुंधरा राजे पर भारी पड़ते हैं। सचिन पायलट सीएम पद के भी दावेदार हैं। 41 साल के सचिन पायलट यहां कांग्रेस का भविष्य हैं जो लंबी रेस के लिए पूरी तरह तैयार दिखते हैं। वह टोंक से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं और यहां का नतीजा उनके आगे की राह तैयार करेगा। 

भाजपा ने यहां अजमेर और अलवर लोकसभा उपचुनाव में अपनी सीटें गंवाईं जो उसके लिए बडा़ झटका थी। इसके अलावा उसने मांडलगढ़ विधानसभा सीट भी कांग्रेस के हाथों गंवाई। इन नतीजों ने तय कर दिया था कि आने वाला वक्त भाजपा के लिए बेहद मुश्किल भरा साबित होने वाला है। अगर भाजपा वापसी करती है तो नया इतिहास रचेगी लेकिन इसका श्रेय वसुंधरा राजे को नहीं बल्कि पीएम मोदी को ही जाएगा। अगर कांग्रेस सत्ता छीनने में कामयाब रहती है तो जीत का सेहरा सचिन पायलट के सिर सबसे ज्यादा बंधेगा। बहरहाल, ऊंट किस करवट बैठेगा और किसे सिंहासन पर बैठने का मौका मिलेगा इसका खुलासा 11 दिसंबर 2018 को होगा। 
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