दौसा से सांसद हरीश मीणा ने भाजपा से नाता तोड़ा और अगले ही दिन कांग्रेस ने उन्हें देवली-उनियारा से विधायकी का टिकट दे दिया। इसी तरह कांग्रेस ने सूची जारी होने से पांच घंटे पहले उसके खेमे में आए कन्हैया लाल झंवर को बीकानेर पूर्व से टिकट दी। पार्टी ने नेता रामेश्वर डूडी की जिद के कारण झंवर की टिकट बनाए रखी है। हाल ही में वीआरएस लेने वाले आईपीएस अधिकारी सवाई सिंह को कांग्रेस ने खींवसर से प्रत्याशी बनाया है तो नवलगढ़ से कांग्रेस के मौजूदा उम्मीदवार राजकुमार शर्मा निर्दलीय विधायक रहे हैं।
पार्टियों द्वारा रातों रात प्रत्याशी बदलने का बड़ा उदाहरण भाजपा के यूनुस खान हैं। पार्टी ने नामांकन के आखिरी दिन उन्हें टोंक से अपना प्रत्याशी बनाया जबकि उनकी सीट डीडवाना है। पार्टी ने टोंक से मौजूदा विधायक अजित सिंह मेहता का नाम काट दिया है जबकि वह सूची में नाम आने के बाद नामांकन भर चुके थे। कांग्रेस में भी ऐसे अनेक नाम हैं।उल्लेखनीय है कि बाहरी या पैराशूट उम्मीदवारों के विरोध में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना कर रही है। कई जगह पर कार्यकर्ता खुलकर विरोध जता चुके हैं तो अनेक जगह टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर मैदान में हैं।
इसका बड़ा उदाहरण गंगानगर है। यहां कांग्रेस ने कुछ महीने पहले ही पार्टी में आए अशोक चांडक को प्रत्याशी बनाया है। इसके विरोध में पार्टी के पुराने नेता व टिकट के दावेदार राजकुमार गौड़ और जयदीप बिहाणी निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर गए हैं। भाजपा ने यहां एक नये चेहरे विनीता आहूजा को मौका दिया तो पिछले चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रहे राधेश्याम निर्दलीय लड़ रहे हैं। यही नहीं पार्टी के जिला उपाध्यक्ष प्रहलाद राय ने पार्टी छोड़ दी है और वह बसपा के प्रत्याशी बने हैं।