पाली से जोधपुर जाते हुए अचानक कार चालक ने हाई वे के किनारे कच्चे में ले जाकर कार रोक दी। रात करीब पौने ग्यारह बजे अचानक कार रुकते ही मेरा चौंकना स्वाभाविक था। चालक करण ने कहा कि साहब बुलेट बाबा को माथा टेककर आगे बढेंगे। यही यहां की रिवायत है। मैं भी उतरा। सामने सड़क के किनारे एक मंदिर और उसके सामने एक साधु की धू-धू करके जलती धूनी। कोई दस पंद्रह लोग मंदिर पर माथा टेक रहे थे और धूनी की लपटों पर हाथ फिराते हुए पास ही रखे थाल से प्रसाद ले रहे थे।
पाली का यह मंदिर ओम मंदिर के नाम से मशहूर है जहां बुलेट बाबा की पूजा होती है। मंदिर में मूर्ति की जगह फूल मालाओं से लदी बुलेट यानी रॉयल एनफील्ड की बुलेट मोटर साइकिल की खड़ी है। लोग यहां आते हैं और बुलेट बाबा को माथा टेकते हैं। मान्यता है कि यहां माथा टेक कर आगे जाने वालों की यात्रा सकुशल संपन्न होती है। इस मंदिर की कहानी बेहद दिलचस्प है। बताया जाता है कि पास ही के चोटाला गांव के ओम सिंह का करीब 25 वर्ष पहले अपनी बुलेट मोटर साइकिल से इसी जगह सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।
पुलिस ने कानूनी खानापूरी की और उनकी मोटर साइकिल को थाने में में जमा कर दिया। लोग बताते हैं कि कुछ देर बाद मोटर साइकिल खुद ब खुद स्टार्ट होकर थाने से निकलकर फिर दुर्घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने पहले उसे किसी की शरारत समझा और वापस मोटरसाइकिल थाने में खड़ी कर दी गई। पर फिर यही हुआ। लोगों के मुताबिक यह कवायद कई दिनों तक चली। आखिर पुलिस ने हार मान ली और जहां दुर्घटना हुई थी, वहीं सड़क के किनारे मोटर साइकिल खड़ी कर दी गई। इसके बाद वहां बुलेट बाबा का मंदिर बन गया, जिसमें ओम सिंह की मूर्ति और मोटर साइकिल दोनों को स्थापित कर दिया गया।
तबसे यह स्थान बुलेट बाबा और ओम मंदिर के नाम से मशहूर हो गया। बताया जाता है कि पहले यहां शराब से भोग लगाया जाता था और श्रद्धालु बोतल में शराब लेकर चढ़ाते थे। लेकिन बाद में एक जिलाधिकारी ने शराब चढ़ाने पर पाबंदी लगा दी। लेकिन अब भी कुछ श्रद्धालु बोतल के ढक्कन में शराब भरकर यहां चढ़ाते हैं। तब से यहां रुककर मत्था टेकना वाहन चालकों की रिवायत बन गया है।