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राजस्थान: एक गांव ऐसा भी जहां कबूतर हैं करोड़पति

Sun, 24 Jan 2021 12:15 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
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बम्बोरी के गांव वाले कबूतरों के दाने के लिए राशि एकत्र करते हुए - फोटो : सोशल मीडिया
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राजस्थान में एक ऐसा अनोखा गांव भी है जहां के कबूतर करोड़पति हैं। किसी इंसान का करोड़पति होना तो आम बात है लेकिन कहीं पर पक्षियों का करोड़पति होना तो कोई आम बात बिल्कुल भी नहीं है। बात हो रही है चित्तौड़गढ़ के पास बसे छोटीसादड़ी तहसील के बम्बोरी गांव की, जहां के कबूतर करोड़पति हैं। यहां के ग्रामीण बढ़-चढ़कर दान-पुण्य के काम में हिस्सा लेते है।

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दान में एकत्रित हुआ 1.72 लाख रुपये नकद और 50 बोरी अनाज

हाल ही में बम्बोरी में कबूतरों के लिए 1.72 लाख रुपये नकद और 50 बोरी अनाज दान में एकत्रित हुआ है। इतना ही नहीं गांव वालों ने यहां पर स्थित श्मसान के लिए 50 क्विंटल लकड़ी और 117 यूनिट रक्तदान भी किया है। बता दें, कबूतरों की संपत्ति से हर साल होने वाली लाखों रुपये की आय भी कबूतरों के दानापानी पर ही खर्च की जाती है। गांव वालों ने कबूतरों के नाम पर बैंक खाता भी खोल रखा है, जिसमें लाखों रुपये जमा हैं।

कबूतरों के नाम है सात बीघा जमीन

यहां सदर बाजार में लक्ष्मीनारायण मंदिर के सामने कबूतरखाना है, जहां पर कबूतर प्रतिदिन दिन दो बार एक बोरी अनाज चुग जाते हैं। ग्रामीणों ने बरसों पहले यहां कबूतरखाना समिति भी बना दी थी। इस गांव के कबूतरों के पास भरपूर दाना-पानी, खेती-बाड़ी, बैंक बैलेंस, नौकर-चाकर सब कुछ है। कबूतरों के नाम पर सात बीघा जमीन भी है।

 

 

हर साल मकर संक्रांति पर दान इकट्ठा करते हैं ग्रामीण

दरअसल, हर साल मकर संक्रांति पर समिति के पदाधिकारी और ग्रामीण पूरे गांव में झोली फैलाकर कबूतरों के लिए दान इकट्ठा करते हैं। वहीं, लोग भी अपने सामर्थ्य या इच्छा अनुसार दान देते हैं। इममें वे नकद रुपये, गेहूं, मक्का, आदि दान करते हैं। इस बार मकर सक्रांति पर 1,72,000 रुपये नकद और 50 बोरी अनाज प्राप्त हुआ।

 

 

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50 क्विंटल लकड़ी भी एकत्रित

कबूतरों के लिए बड़ौदा राजस्थान ग्रामीण बैंक शाखा बम्बोरी में खाता भी है। दान पुण्य की भावना रखने वाले बम्बोरी गांव के निवासी कभी-कभी मकर सक्रांति पर रक्तदान शिविर भी लगाते हैं। इस बार पर 117 यूनिट रक्तदान हुआ। इसके अलावा श्मशान में दाह संस्कार के लिए लकड़ी की समस्या खासकर निर्धन परिवारों के लिए रहती है। ऐसे में उनकी सेवा के लिए 50 क्विंटल लकड़ी भी एकत्र किए गए।
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