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राजस्थान: सांभर झील में 10 हजार पक्षियों की मौत, सीएम ने दिए रेस्क्यू सेंटर खोलने के निर्देश

Fri, 15 Nov 2019 02:42 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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मृत पक्षी - फोटो : PTI
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राजस्थान की खारे पानी की सबसे बड़ी झील सांभर में देशी-विदेशी पक्षियों की मौत का सिलसिला जारी है। अबतक करीब 10 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है। स्थिति इस खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है कि बीते तीन दिनों से जेसीबी से गड्ढा खोदकर पक्षियों को जमीन में दफनाया जा रहा है। वहीं, कई मर चुके पक्षी कीचड़ से सड़ने लगे है। माना जा रहा है कि इस वजह से दूसरे पक्षियों की सेहत भी बिगड़ सकती हैं। 

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हालात को देखते हुए बीकानेर अपेक्स सेंटर फॉर एनीमल डिजीज के प्रोफेसर ऐके कटारिया भी शुक्रवार सुबह सांभर पहुंचे। उनका अनुमान है कि पक्षियों के पंखों में लकवा के लक्षण भी मौत की वजह हो सकते है। इसकी वजह एविए बोटुलिज्म हो सकता है। 

इससे पहले, यहां गुरुवार को चीफ वाइल्ड वार्डन समेत कई बडे़ अफसर और एक्सपर्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने 4800 पक्षियों के मरने की बात कही। मौके पर पहुंचे पक्षी विषेषज्ञ के मुताबिक यह संख्या 10 हजार है।
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वायरल इन्फेक्शन से हुईं मौतें: सरकार
पक्षियों की हो रही मौत के मामलों को देखते हुए बुधवार को उच्च न्यायालय ने स्वतःसंज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार से जवाब मांगा था। जिसके बाद गुरुवार को सरकार की तरफ से जवाब पेश किया गया। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि प्रवासी पक्षियों की मौत वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन समेत अन्य कारणों से हो रही है। साथ ही लंबी यात्रा के दौरान पर्याप्त भोजन नहीं मिलना, प्रदूषण और कमजोरी को भी पक्षियों की मौत की वजह बताई गई है।  

मुख्यमंत्री ने आदेश- एक और रेस्क्यू सेंटर खोलें
पक्षियों की हो रही मौतों को देखते हुए सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में गुरुवार रात समीक्षा बैठक की। उन्होंने मौत के कारणों की जांच कर प्रभावी कदम उठाने के आदेश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पक्षियों को बचाने के लिए एक और रेस्क्यू सेंटर खोलें। मृत पक्षियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करें, ताकि संक्रमण न फैले। 

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पक्षियों की मौत के तीन बड़े कारण

पक्षियों के मौत के तीन बड़े कारण हैं- पहला, जो पक्षी मरे, वो दलदल में दब गए हैं और उनमें कीड़े लगना शुरू हो चुका है। जिन्हें दूसरे पक्षी खाकर मर रहे हैं। पक्षियों की मौत का कारण बर्ड फ्लू नहीं है। 
 
दूसरा, यह घटना 'हाइपर नकट्रेमिया' यानी पानी में सोडियम की अत्यधिक मात्रा होने के कारण नशा होने से हुई। वन विभाग के पास एक्सपर्ट, लैब और संसाधन ही नहीं है। 
 
तीसरा कारण यह है कि जहां घटना हुई है, झील के उस क्षेत्र में पानी काफी लंबे समय से नहीं आया था। नमक काफी गाढ़ा हो गया। इस बारिश में यहां पानी आया तो इससे नमक जहरीला बन गया।      
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