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राजस्थान: टिकट बंटवारे की सुगबुगाहट के बीच खेला जाने लगा जाति का खेल

Thu, 01 Nov 2018 12:39 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजस्थान चुनाव
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राजस्थान में जहां एक ओर भाजपा और कांग्रेस के नेता टिकट बंटवारे के लिए माथापच्ची कर रहे हैं वहीं जातिगत संगठनों ने टिकट पाने के लिए लड़ाई छेड़ दी है। प्रदेश की मुख्य राजनीतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस से अपनी संख्या के अनुरूप टिकट पाने के लिए कम से कम 6 जातिगत संगठनों ने इस महीने बैठक की।
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अखिल भारतीय मीणा संगठन के बैनर तले मीणा समुदाय ने 19 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से पत्र लिखकर 15-15 टिकट देने की मांग की। संगठन के मुताबिक राज्य की कुल 13.5 फीसदी अनुसूचित जनजाति की आबादी में मीणा समुदाय की संख्या 7.5% है। राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए 25 सीटें आरक्षित है।

2013 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने मीणा समुदाय के 16 उम्मीदवारों को टिकट दिया था जिनमें से 10 ने जीत दर्ज की थी। जबकि कांग्रेस ने मीणा समुदाय के 17 प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया था जिनमें से दो लोग जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
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21 अक्टूबर को अखिल भारतीय बैरवा महासभा ने 11 सीटों की मांग की। बैरवा समुदाय अनुसूचित जाति से संबंध रखता है। इनके संगठन ने जयपुर में दो और अलवर, बूंदी, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा, कोटा, करौली, सवाई माधोपुर और टोंक में एक-एक विधानसभा की सीटों की मांग की।

राजस्थान में बैरवा समुदाय की संख्या 17 लाख हैं। 2013 में भाजपा ने बैरवा समुदाय के आठ लोगों को उम्मीदवार बनाया था जिनमें से चार की जीत हुई थी। जबकि कांग्रेस के 6 बैरवा उम्मीदवारों को टिकट दिया था।

इसके अलावा माली समुदाय के लोगों ने भी 20 विधानसभा सीटों की मांग की है। राजस्थान माली( सैनी) महासभा के अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा की 15 सीटों पर माली समुदाय की संख्या 25 हजार से ज्यादा है। हमनें अपने उम्मीदवारों की सूची भाजपा और कांग्रेस को सौंप दी है।

राजस्थान के जातिगत समीकरण

राजस्थान में 272 जातियां हैं। इनमें 18% अनुसूचित जाति, 13% अनुसूचित जनजाति, 51% अन्य पिछड़ा वर्ग जबकि 18% लोग अन्य से ताल्लुक रखते हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग में 91 जातियां हैं जिनमें जाटों की संख्या 9 %, गुर्जरों की 5% और मालियों की संख्या 4% है।

अनुसूचित जाति में 59 उप-जातियां हैं। इनमें मेघावत की संख्या 6% और बैरवा की 3% है। अनुसूचित जनजाति में 12 उप-जातियां हैं। मीणा समुदाय की संख्या 7 % और भील की संख्या 4% है। इसके अलावा प्रदेश में ब्राह्मणों की संख्या 7%, राजपूतों की संख्या 6% और वैश्यों की संख्या 4% है।
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