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Rajasthan: पुष्कर की 'प्राचीन होली' पर प्रशासन ने रोक लगाई तो संत समाज करेगा उग्र आंदोलन, SDM को सौंपा ज्ञापन

Tue, 28 Feb 2023 04:51 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

एसडीएम निखिल कुमार ने कहा है कि पुष्कर की पारंपरिक होली पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। स्थानीय लोग गैर नृत्य डांडिया नृत्य सहित होली महोत्सव मना सकते हैं।
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एसडीएम कार्यालय पहुंचा संत समाज। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के अजमेर जिले की तीर्थ नगरी पुष्कर में होली फेस्टिवल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच मंगलवार को पुष्कर के संत समाज ने उपखंड अधिकारी निखिल कुमार को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया कि पुष्कर में प्राचीन परंपराओं के अनुसार मनाए जाने वाले होली महोत्सव पर अगर किसी भी प्रकार की पाबंदी लगाई गई तो संत समाज उग्र आंदोलन करेगा, जिसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।

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संत समाज की ओर से कपालेश्वर महादेव मंदिर के महंत सेवानंद गिरि महाराज, चित्रकूट धाम के महंत पाठक जी महाराज, राम सखा आश्रम के महंत नंदा राम महाराज, राम रमैया आश्रम के महंत प्रेमदास महाराज, ब्रह्मा मंदिर के महंत प्रज्ञान पुरी, रामसनेही आश्रम के धीरज राम महाराज, दादू दयाल के महामंडलेश्वर रामभजन दास महाराज सहित अन्य साधु-संतों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया।  

इस अवसर पर एसडीएम निखिल कुमार ने कहा है कि पुष्कर की पारंपरिक होली पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। स्थानीय लोग गैर नृत्य डांडिया नृत्य सहित होली महोत्सव मना सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग पर ही वराह घाट चौक, ब्रह्म चौक पर धुलंडी पर होने वाले  भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्थान बदला गया है। लोग मेला मैदान में धुलंडी के दिन होली महोत्सव मना सकते है, किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं है।  
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बाजारों में भीड़ अधिक ना हो और पुष्कर की धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने धुलंडी के दिन वराह घाट चौक और ब्रह्म चौक का होली महोत्सव मेला मैदान में आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की कोई पाबंदी नहीं है। कुछ लोग गलत अफवाह फैला रहे हैं। 

सेवानंद महाराज ने बताया कि तीर्थराज पुष्कर में प्राचीन काल से सनातन धर्म के अनुसार होली महोत्सव मनाने की जो परंपरा चली आ रही है, उस पर सरकारी फरमान थोप कर किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न ना की जाए। उन्होंने कहा कि पुष्कर की जनता को बिना विश्वास में लिए होली महोत्सव की प्राचीन परंपरा में परिवर्तन न किया जाए। करोड़ों हिंदुओं की मान मर्यादा को सुरक्षित रखने के लिए जो व्यवस्था करना अपेक्षित है, वो शासन प्रशासन को करनी चाहिए। 

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