सचिन पायलट की कांग्रेस अलाकमान के साथ सोमवार को हुई बैठक के बाद अब राजस्थान में लंबे समय से जारी सियासी उठापटक समाप्त होती नजर आ रही है। इस बैठक में जहां पायलट ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने अपनी सभी समस्याएं रखीं तो राहुल ने भी सभी मुद्दों पर विचार कर उचित फैसला लेने का आश्वासन दिया। पायलट ने इस दौरान कहा कि उनकी कोई भी गतिविधि पार्टी विरोधी न होकर राजस्थान के मुख्य मंत्री गहलोत के विरोध में थी। ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजस्थान का राजनीतिक संकट समाप्त हो गया है...
विवादों को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन
सोमवार को हुई बैठक में कांग्रेस ने एलान किया कि सचिन पायलट की ओर से उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। ऐसा करते हुए पार्टी ने राजस्थान में चल रही आंतरिक कलह और राजनीतिक संकट को खत्म करने का संकेत दिया। पार्टी की ओर से यह बयान पायलट की राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात के कुछ घंटों बाद आया।
भंवर लाल शर्मा की मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात
इसी बीच, पायलट के समर्थक रहे कांग्रेस के बागी विधायक भंवर लाल शर्मा ने मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाकात की। उन्होंने कहा, 'पार्टी एक परिवार की तरह है और अशोक गहलोत इस परिवार के मुखिया हैं।' बता दें कि पायलट और 18 अन्य विधायकों ने राजस्थान में कांग्रेस सरकार के खिलाफ विद्रोह किया था, जिसके बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
बसपा विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट आज छह बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। ये विधायक पिछले साल कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इससे सदन की 200 सीटों में कांग्रेस की संख्या 107 हो गई थी। अगर इस विलय को अवैध करार दिया जाता है तो ये विधायक विश्वास मत के लिए बसपा द्वारा जारी व्हिप या अयोग्यता का सामना करेंगे। बसपा कह चुकी है कि वह अपने विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट करने को कहेगी।
भाजपा के सभी विधायकों की बैठक
भाजपा ने आज अपने सभी विधायकों की जयपुर के एक होटल में बैठक बुलाई थी, लेकिन उसे रद्द कर दिया गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा है कि कुछ विधायकों के गुजरात में होने के चलते वह शामिल नहीं हो पाएंगे और आज जन्माष्टमी भी है। यह तय किया गया है कि विधायकों की बैठक जन्माष्टमी के बाद आयोजित की जाएगा।
इससे पहले पार्टी अपने 18 विधायकों को गुजरात पहुंचा चुकी है। इसके पीछे विधायकों की खरीद फरोख्त का कारण बताया गया है, भाजपा राज्य इकाई के भीतर गुटबाजी को भी फैसले के कारणों में से एक माना जा रहा है। वहीं, अशोक गहलोत की सरकार को समर्थन दे रहे 10 निर्दलीय विधायक भी 31 जुलाई से जैसलमेर में दो होटलों में रुके हुए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का टूटा मौन
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे का मौन सभी को खल रहा था। लेकिन, आखिरकार वसुंधरा राजे ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से दिल्ली में मुलाकात की। राज्य में चल रहे राजनीतिक संकट के दौरान भाजपा के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा राजे पर आरोप लगाया था कि वह राजस्थान की गहलोत सरकार को बचाने की कोशिश कर रही हैं।