संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि पुलिस विभाग में सहायक उप निरीक्षक के तीन हजार पांच सौ पद बढ़ाए गए हैं। जिससे कांस्टेबल की पदोन्नति के अवसर बढ़ेंगे। एक तरफ शांति धारीवाल अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। वहीं उन्होंने कहा कि राजस्थान में महिलाओं के विरूद्ध अपराधों पर सख्त कार्रवाई की गई है।
निर्बाध एफआईआर से अपराध में वृद्धि
उन्होंने बताया कि 2013 के मुकाबले 2019 में अपराध 14 प्रतिशत ही बढ़ा था, यानि प्रति साल केवल 2.3 प्रतिशत बढ़ा था। यह एक सामान्य वृद्धि है और राष्ट्रीय औसत 22 प्रतिशत से भी कम है। यह इसलिए हुआ क्योंकि इन वर्षों में निर्बाध एफआईआर पंजीकरण नहीं हुआ था। वर्तमान सरकार के आने के बाद निर्बाध एफआईआर पंजीकरण होने से 2018 की तुलना में 2019 में वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि निर्बाध एफआईआर पंजीकरण को सख्ती से लागू करने के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय से थानों की जांच करने के लिए डिकॉय ऑपरेशन भी चलाये गए हैं। पुलिस थानों में 756 स्वागत कक्षों का संचालन भी प्रारंभ हो चुका हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस ने भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विजन-2030 प्लान बनाया है। देश में राजस्थान पुलिस एक मात्र फोर्स है, जिसने ऐसा दस्तावेज बनाया है जिसमें अगले 10 वर्षों का विजन हीं नहीं बल्कि उसे प्राप्त करने का एक्शन प्लान भी बनाया है।
महिला अपराध में यूपी और राजस्थान की तुलना की
धारीवाल ने बताया कि हर जिले में पुलिस अधीक्षक के अधीन एक डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम का गठन भी किया गया है, जो इंटेलीजेंस एकत्रित कर संगठित अपराधों के विरूद्ध कार्यवाही करती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट 2020 के अनुसार महिला अत्याचारों में उत्तरप्रदेश शीर्ष स्थान पर रहा है। राजस्थान में वर्ष 2020 में महिला अत्याचार के कुल प्रकरणों में से 45 प्रतिशत प्रकरण अनुसंधान के बाद सही नहीं पाये गये हैं। जबकि उत्तरप्रदेश में न केवल सबसे ज्यादा प्रकरण दर्ज हुए है बल्कि 95 प्रतिशत सही भी पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों में राजस्थान पुलिस ने 510 पॉक्सो एक्ट प्रकरणों में अपराधियों को सजा दिलाई है। इनमें 35 प्रकरणों में आजीवन कारावास और 4 प्रकरणों में मृत्युदण्ड की सजा दिलाई गयी है।