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Balotra News: पचपदरा रिफाइनरी का लोकार्पण आज, राजस्थान बनेगा देश का नया ऊर्जा हब, जानिए इसकी खास बातें

Sat, 04 Jul 2026 06:00 AM IST
बालोतरा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

सार

बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी अब देश की ऊर्जा शक्ति बनने जा रही है। 79 हजार करोड़ रुपये की इस मेगा परियोजना का लोकार्पण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। जानिए क्यों यह सिर्फ रिफाइनरी नहीं, बल्कि राजस्थान की आर्थिक क्रांति की शुरुआत है। जानिए क्या है इस रिफाइनरी की खास बातें...
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पदपचरा रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान का बालोतरा जिला अब केवल अपने नमक उत्पादन, हस्तशिल्प और मरुस्थलीय पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। पचपदरा की धरती अब देश के ऊर्जा क्षेत्र का नया केंद्र बनने जा रही है। वर्षों के इंतजार, हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लंबे निर्माण कार्य के बाद तैयार हुआ देश का पहला ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स अब राष्ट्र को समर्पित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस ऐतिहासिक परियोजना का लोकार्पण करेंगे।
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यह परियोजना केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए एक मील का पत्थर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके शुरू होने से राजस्थान देश के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल उद्योग के प्रमुख राज्यों में शामिल हो जाएगा।

देश की पहली ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी
पचपदरा रिफाइनरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जहां रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स दोनों एक साथ विकसित किए गए हैं। आमतौर पर देश में रिफाइनरियां केवल कच्चे तेल को शुद्ध कर पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन तैयार करती हैं, लेकिन पचपदरा परियोजना इससे कहीं आगे बढ़कर पेट्रोकेमिकल उत्पादों का भी बड़े स्तर पर निर्माण करेगी। यही कारण है कि इस परियोजना को केवल एक रिफाइनरी नहीं बल्कि एक इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल हब माना जा रहा है, जो कच्चे तेल से लेकर उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों तक की पूरी श्रृंखला तैयार करेगा।
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पदपचरा रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
79 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 79,450 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। यह निवेश राजस्थान में अब तक हुए सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल है। इस परियोजना का संचालन एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की 74 प्रतिशत तथा राजस्थान सरकार की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

9 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली विशाल रिफाइनरी
रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि यह संयंत्र हर वर्ष लगभग 90 लाख टन कच्चे तेल को प्रोसेस करेगा। यदि इसे दैनिक क्षमता में समझें तो यहां करीब 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल की प्रतिदिन प्रोसेसिंग की जा सकेगी। इतनी बड़ी क्षमता वाली यह रिफाइनरी राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों की पेट्रोलियम आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, कई औद्योगिक उत्पाद भी बनेंगे
इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत इसका पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। यहां केवल पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसे ईंधन ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि कई उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पाद भी तैयार होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से-
  • पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene)
  • पॉलीएथिलीन (Polyethylene)
  • बेंजीन (Benzene)
  • बेटाडीन (Betadiene) जैसे उत्पाद शामिल हैं।

 

पदपचरा रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
2.4 मिलियन मीट्रिक टन पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता
रिफाइनरी के साथ विकसित पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स की वार्षिक क्षमता लगभग 2.4 मिलियन मीट्रिक टन रखी गई है। इससे भारत में पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल देश में ही उपलब्ध हो सकेगा। आधुनिक तकनीक से तैयार इस रिफाइनरी में पर्यावरण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। यहां BS-VI मानकों के अनुरूप स्वच्छ ईंधन तैयार किया जाएगा, जिससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही रिफाइनरी में Zero Liquid Discharge (ZLD) तकनीक अपनाई गई है। इस तकनीक के तहत औद्योगिक अपशिष्ट जल का दोबारा उपयोग किया जाएगा और किसी भी प्रकार का प्रदूषित पानी बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।

बाड़मेर बेसिन के कच्चे तेल का भी होगा उपयोग
यह रिफाइनरी केवल आयातित कच्चे तेल पर निर्भर नहीं रहेगी। ये बाड़मेर बेसिन में निकलने वाले क्रूड ऑयल को भी यहां प्रोसेस किया जाएगा। इससे राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और स्थानीय तेल उत्पादन को नई दिशा मिलेगी।

वर्षों की प्रतीक्षा के बाद साकार हुआ सपना
इस परियोजना की घोषणा पहली बार वर्ष 2008 में की गई थी। हालांकि विभिन्न प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय कारणों से परियोजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। बाद के वर्षों में परियोजना को नई गति मिली और तेजी से निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब लगभग डेढ़ दशक के लंबे इंतजार के बाद यह परियोजना तैयार होकर राष्ट्र को समर्पित होने जा रही है।

 
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पदपचरा रिफाइनरी - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान के ऊर्जा मानचित्र में ऐतिहासिक बदलाव
जो पचपदरा क्षेत्र कभी मरुस्थलीय वीरानी और नमक उत्पादन के लिए जाना जाता था, वही अब देश के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में शामिल होने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में राजस्थान की औद्योगिक तस्वीर बदल सकती है। इससे न केवल राज्य की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि निवेश, रोजगार, बुनियादी ढांचे और निर्यात के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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प्रधानमंत्री करेंगे राष्ट्र को समर्पित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पचपदरा पहुंचकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहेंगे। विशेषज्ञों की मानें तो पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान के भविष्य की नई नींव है। अत्याधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ईंधन उत्पादन, पेट्रोकेमिकल निर्माण, विशाल निवेश और रोजगार की अपार संभावनाओं के साथ यह परियोजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।
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