सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स के बीच पहचान बनाने वाले इन्फ्लुएंसर पवन साहू अब अपने पैतृक गांव फुलियाखुर्द में विकास कार्यों को लेकर चर्चा में हैं। भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा पंचायत समिति की एक ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव की सरगर्मियों के बीच पवन साहू ने जनसंपर्क अभियान के साथ ही गांव की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए काम शुरू कराने का दावा किया है।
पवन साहू अपनी सोशल मीडिया रील्स के जरिए गांव की समस्याओं और विकास को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि वे पिछले डेढ़ साल से गांव और पंचायत क्षेत्र की समस्याओं को सूचीबद्ध कर रहे थे। गांव से रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते समय जब वे गंदगी और अव्यवस्थाएं दिखाते थे, तो उनके फॉलोअर्स कमेंट के जरिए उन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते थे। पवन साहू के अनुसार, लोगों की प्रतिक्रियाओं ने उनके मन में गांव के विकास के लिए कुछ करने का जज्बा पैदा किया।
तीन बोरिंग और मंदिर मार्ग का काम शुरू कराने का दावा
पवन साहू के अनुसार, गांव में पानी की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपने खर्च पर तीन बोरिंग खुदवाए हैं। इसके अलावा, देवनारायण भगवान के स्थान तक पहुंचने वाले रास्ते का काम भी शुरू कराया है। उनका कहना है कि यह रास्ता करीब 20 साल से लंबित था। इन कार्यों के जरिए वे ग्रामीणों की उन समस्याओं को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं, जिनका समाधान लंबे समय से नहीं हो पाया था।
पवन साहू का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में शिक्षा, रोशनी, पेयजल, धार्मिक स्थलों की देखभाल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी काम करने की जरूरत है। वे इन विषयों को अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बता रहे हैं। हालांकि, कराए जा रहे कार्यों की लागत, तकनीकी स्वीकृति और संबंधित विभागों की भूमिका जैसे पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
‘सरपंच बनूं या नहीं, गांव के लिए काम करूंगा’
उनके इस संदेश में चुनावी परिणाम से परे गांव के प्रति जिम्मेदारी निभाने की बात प्रमुखता से सामने आ रही है। पवन साहू ग्रामीणों से मिलने, उनकी समस्याएं सुनने और जरूरतों के अनुसार काम करने का दावा कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि विकास केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समस्याओं के समाधान की शुरुआत जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।
शराब बांटकर वोट नहीं मांगने का दावा
पवन साहू ने चुनाव प्रचार को लेकर भी अपनी रील्स में स्पष्ट रुख रखा है। उनका कहना है कि वे चुनाव जीतने के लिए किसी गलत तरीके का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वे न तो मतदाताओं को शराब पिलाएंगे और न ही शराब बांटकर वोट मांगेंगे। उनके अनुसार, वे ग्रामीणों को किसी भ्रम में रखने के बजाय उनके सामने अपनी सोच और कार्यों को स्पष्ट रूप से रख रहे हैं।
यह बयान पंचायत चुनाव में प्रचार के तरीकों और मतदाताओं के सामने रखे जाने वाले मुद्दों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पवन साहू का कहना है कि वे गांव के लोगों द्वारा बताई गई समस्याओं के अनुरूप काम करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके दावों और कार्यों का वास्तविक आकलन ग्रामीणों के अनुभव तथा संबंधित कार्यों की स्थिति के आधार पर किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया के साथी भी गांव पहुंच रहे
पवन साहू की चुनावी गतिविधियों को सोशल मीडिया पर भी प्रचार मिल रहा है। उनके समर्थन में अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी गांव पहुंच रहे हैं और अपने-अपने अंदाज में वीडियो व रील्स के जरिए प्रचार कर रहे हैं। इससे फुलियाखुर्द का सरपंच चुनाव डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा का विषय बन रहा है।
पवन साहू की बड़ी ऑनलाइन पहुंच उनके संदेश को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचा रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और स्थानीय मतदाताओं का समर्थन अलग-अलग पहलू हैं। पंचायत चुनाव में गांव की बुनियादी समस्याओं, प्रत्याशी की उपलब्धता, विकास की व्यावहारिक योजना और ग्रामीणों के साथ संवाद की भी अहम भूमिका रहेगी।
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अब दावों की कसौटी पर विकास कार्य
फुलियाखुर्द में पवन साहू की पहल ने पंचायत चुनाव की चर्चा को केवल प्रत्याशी और प्रचार तक सीमित नहीं रहने दिया है। तीन बोरिंग खुदवाने और वर्षों से लंबित मंदिर मार्ग का काम शुरू कराने के उनके दावे अब गांव में विकास की बहस के केंद्र में हैं। आने वाले समय में इन कार्यों की प्रगति और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर उनकी योजनाओं पर भी नजर रहेगी। पवन साहू का संदेश है कि गांव का विकास किसी एक पद का मोहताज नहीं होना चाहिए। अब देखना होगा कि उनकी ओर से शुरू कराए गए कार्य कितनी प्रभावी ढंग से पूरे होते हैं और चुनाव के दौरान विकास का यह मुद्दा ग्रामीणों के बीच किस रूप में सामने आता है।