कभी स्कूल-कॉलेज जाने पर रोक, तो कभी मनमर्जी के कपड़े पहनने पर पाबंदी। या फिर कभी घर से बाहर निकलने पर ही मनाही। बिना किसी कसूर के अक्सर लड़कियों से इस पुरुष प्रधान समाज में उनकी स्वतंत्रता छीन ली जाती है।
ताजा उदाहरण राजस्थान के उदयपुर जिले के सालुमबुर शहर में देखने को मिला, जहां पर पंचायत ने लड़कियों के विवाह समारोह आदि में नाचने और मोबाइल फोन रखने पर ही रोक लगा दी है।
अंजुमन मुस्लिम पंचायत के सचिव हबीबुर्रहमान ने बताया कि हमने अपने समुदाय के परिवारों को कहा है कि वह लड़कियों को मोबाइल फोन लेकर बाहर न जाने दें। हालांकि परिवार के सामने वह इसका उपयोग कर सकती हैं, लेकिन इसे स्कूल या कॉलेज ले जाने पर कड़ी मनाही है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वह लड़कों से संपर्क न कर सकें।
सचिव ने आगे कहा, ‘हम नहीं चाहते कि महिलाएं लोगों की नजरों में ज्यादा आएं, इसलिए हमने विवाह समारोह आदि में उनके नाचने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि वह अपने घर में नाच-गाने का कार्यक्रम कर सकती हैं।’
अपने इस तुगलकी फरमान पर तर्क देते हुए वह कहते हैं, ‘यह सब लड़कियों की सुरक्षा के लिए है। हमारे समुदाय में ऐसे मामले देखने को मिले हैं, जहां लड़के और लड़की ने अंतर्जातीय विवाह कर लिया। यह एक गंभीर परंपरा है और हम नहीं चाहते कि यह सब हो, इसलिए पंचायत ने यह फैसले लिए हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हम महिलाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं। हम उन्हें अच्छी शिक्षा देने के पक्ष में हैं, लेकिन साथ ही हम यह भी चाहते हैं कि वह सामाजिक बंधनों का सम्मान करें।’ प्रेम विवाह के खिलाफ युवाओं को चेतावनी देते हुए हबीबुर्रहमान ने कहा कि ऐसा करने पर लड़का-लड़की के परिवार पर 51-51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
‘हम नहीं चाहते कि हमारे समुदाय में अंतर्जातीय प्रेम विवाह की परंपरा शुरू हो। हम लड़कियों की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सामाजिक बंधनों का सम्मान करना चाहिए।’--हबीबुर्रहमान, अंजुमन मुस्लिम पंचायत