पाली-जोधपुर रोड पर स्थित साईं बाबा मंदिर के निकट बुधवार दोपहर कोई मां अपनी नवजात बालिका को लावारिस छोड़कर चली गई। यहां सरकारी कर्मचारियों के लिए बने हुए क्वाटर्स के पीछे छोड़ गई। इस नवजात के रोने की आवाज जब यहां रहने वाली मुन्नी फुलवारी को सुनाई दी तो वह किसी अनहोनी की आशंका के चलते अपनी परिचित दीपिका राजपुरोहित को साथ लेकर फ्लैट से नीचे गई। वहां जाकर देखने पर पता चला कि प्रसव के बाद किसी प्रसूता ने इस नवजात बालिका को मरने के लिए छोड़ दिया है।
इसके बाद इन दोनों ने बालिका को अपने घर से कपड़ा लाकर साफ किया। इस दौरान वहां भीड़ भी इकट्ठी हो गई और इनमें से किसी ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी।
पुलिस ने नवजात को पहुंचाया अस्पताल...
इस सूचना पर औद्योगिक थाने से हेड कांस्टेबल जोगेन्द्र मौके पर पहुंचे और नवजात को बांगड़ अस्पताल पहुंचाया। जहां उसे एनआईसीयू वार्ड में भर्ती तुरन्त भर्ती कर उसका उपचार प्रारंभ किया गया। बांगड़ अस्पताल में नवजात को ले जाने पर वहां नियुक्त डॉक्टर रणजीत राजू, अमित शर्मा की देखरेख नर्सिंग स्टॉफ भावना सेजू, आकाश जोशी, राजेश भाटी, प्रकाश चौहान ने मासूम का उपचार शुरू किया, जिसके चलते अब नवजात खतरे से बाहर है।
जान भी जा सकती थी नवजात की...
नवजात को लावारिस छोड़ने के तुरन्त बाद यदि उस पर किसी की नजर नहीं पड़ती तो यहां घूम रहे श्वान उसे अपना भोजन भी बना सकते थे। गनीमत यह रही कि उसकी आवाज सुनकर फ्लैट में रहने वाली महिलाएं समय रहते वहां पहुंच गई और उसे वहां से हटा लिया, और तो और बालिका को समय पर मेडिकल एड भी मिल गई, अन्यथा उसकी जान भी जा सकती थी।
घर पर ही हुआ है जन्म...
नवजात का उपचार कर रहे चिकित्सकों के अनुसार अब वह स्वस्थ है। डॉ आरके विश्नोई के अनुसार, उसका वजन दो किलो 200 ग्राम है, जिसके शरीर पर किसी अस्पताल का टैग लगा हुआ नहीं होने से लगता है कि प्रसूता ने बच्ची को अपने घर जन्म घर पर ही जन्म दिया है।